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बहुमंजिली इमारतों में फंसे लोगों को निकालेगी ‘जाली’

December 6, 2015 9:27 pm by: Category: विज्ञान Comments Off A+ / A-

Bhawanनई दिल्ली, 6 दिसम्बर (आईएएनएस)| भारतीय रक्षा वैज्ञानिकों ने एक महत्वपूर्ण कामयाबी हासिल करते हुए बहुमंजिली इमारतों में आग लगने एवं भूंकप जैसी प्राकृतिक आपदाएं होने पर इमारत में फंसे लोगों को सुरक्षित बाहर निकालने का आसान तरीका विकसित किया है। इमरजेंसी इस्केप शूट गोलाकार आकार की बहुत लंबी जाली है, जिसके जरिये लोगों को सुरक्षित निकाला जा सकेगा। इमरजेंसी इस्केप शूट (ईईसी) नामक इस युक्ति का विकास रक्षा मंत्रालय के रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) के तहत कार्यरत सेंटर फॉर फायर, एक्सप्लोसिव एंड एनवायरमेंट सेफ्टी (सीएफईईएस) के वैज्ञानिकों ने किया है।

इमरजेंसी इस्केप शूट (ईईसी) को भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी), दिल्ली के परिसर में शुक्रवार से शुरू हुए भारत के अब तक के सबसे बड़े विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं औद्योगिक मेले में प्रदर्शित किया गया है।

इस उपकरण के विकास में शामिल सीएफईईएस के उप निदेशक डा. प्रवीण राजपूत ने बताया कि इसके जरिये 50 मीटर तक ऊंची इमारत से लोगों को सुरक्षित निकाला जा सकता है। गोलाकार जाली के आकार वाले इस उपकरण का पेटेंट प्राप्त किया जा चुका है और शीघ्र ही इसका प्रौद्योगिकी हस्तांतरण (टेक्नोलॉजी ट्रांसफर) होगा और उसके बाद इसका सार्वजनिक उपयोग शुरू हो जाएगा।

यह गोलाकार आकार की बहुत लंबी जाली है, जिसे आग लगने या प्राकृतिक आपदा के समय इमारत की किसी भी मंजिल से लटकाया जा सकता है और उस मंजिल में रहने वाले सभी लोगों को सुरक्षित जमीन पर उतारा जा सकता है।

इसकी जाली अत्यंत मजबूत अग्नि शमन पदार्थ ‘केवियर फाइबर’ से बनी होती है और यह जाली पांच टन तक का वजन संभाल सकती है। इस्पात से भी अधिक मजबूत इस जाली को आग से किसी तरह का नुकसान नहीं होता है।

इस लंबी गोलाकार ट्यूबनुमा जाली में एक-एक मीटर के अंतराल पर अल्युमिनियम मिश्रधातु निर्मित छल्ले लगे हुए हैं, जिसके जरिये लोग उपर से नीचे उतर सकते हैं। इसे आसानी से कही भी ले जाया जा सकता है और प्राकृतिक आपदा की स्थिति में बहुमंजिली इमारत के किसी भी हिस्से से लटकाया जा सकता है।

उन्होंने बताया कि ईईसी के विकास का उद्देश्य हाइड्रोलिक लिफ्ट या स्टील से बनी टावर/एरियल सीढ़ी का सस्ता एवं कारगर विकल्प पेश करना है। इसमें जरूरत के अनुसार, परिवर्तन करना संभव है। इसका इस्तेमाल राहत कार्यो में भी हो सकता है। इसे किसी हेलीकॉप्टर के साथ लटका कर लोगों को किसी आपदाग्रस्त इलाके से बाहर निकाला जा सकता है।

सीएफईईएस ने हल्के वजन के ‘फायर प्रोक्सिमिटी श्यूट’ भी विकसित किया है, जिसमें सुरक्षात्मक पदार्थो की पांच परतें हैं।

उन्होंने बताया कि फिलहाल इसकी कीमत 80 से 90 हजार रुपये प्रति मीटर है और पर्याप्त लंबाई वाले उपकरण की कीमत 15 लाख रुपये के आसपास पड़ेगी। लेकिन इसका व्यावसायिक उत्पादन शुरू होने पर इसकी कीमत में काफी कमी आएगी। इसका इस्तेमाल अग्निशमन विभाग और नागरिक सुरक्षा एजेंसियां कर सकती हैं।

इस मेले में अनेक रोचक, जनोपयोगी तथा नवीन उत्पादों एवं प्रौद्योगिकियों को दुनिया में पहली बार प्रदर्शित किया जा रहा है। इनमें कंफोकल माइक्रोस्कोप (सीएसआईआर), जम्मू-कश्मीर में औषधीय एवं सुगंधित पौधों के बारे में अनुसंधान कार्य, स्वदेशी दंत प्रत्यारोपण, बेकार प्लास्टिक को ओटोमोटिव ईंधन में बदलने की तकनीक तथा कम प्रदूषण पैदा करने वाले ऊर्जा सक्षम ब्रास मेटल फर्नेस शामिल हैं।

यह एक्सपो आठ दिसंबर तक सुबह साढ़े 10 बजे से लेकर शाम छह बजे तक आम लोगों के लिए खुला रहेगा।

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