Friday , 24 November 2017

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सावधान! कहीं आपके साथ न हो जाए ऐसी धोखाधड़ी

इंदौर। महालक्ष्मीनगर के निर्माण में गड़बड़ी करने वाले 18 लोगों के खिलाफ प्रशासन ने भले ही रिपोर्ट दर्ज करवा दी है लेकिन कई सवाल अब भी अधूरे रह गए हैं। सबसे बड़ी बात यह है कि इतने सारे निर्माण अवैध रूप से बरसों तक तनते रहे, तब प्रशासन ने पंचायत के घपलों पर कोई निगरानी क्यों नहीं की, जबकि इनकी शिकायतें चार-पांच साल से लगातार की जा रही थी।

मौका मुआयना कर रजिस्ट्री करने का दम भरने वाले रजिस्ट्रार विभाग को क्या ये घपले नजर नहीं आए? बैंक वाले तो इंच-टेप लेकर फ्लैट नापते हैं, फोटो खींचते हैं, नक्शा देखते हैं, उसके बाद लोन देते हैं, फिर उन्हें यहां क्या हो गया था। जब लोग फ्लैट खरीदकर फंस गए और बिल्डर पैसा कमाकर निकल गए, उसके बाद रिपोर्ट दर्ज हुई।

बिल्डरों को तलब करेंगे रहवासी
अपने आशियाने गलत तरीके से बने होने की सूचना मिलने के बाद उन बिल्डिंग में रहने वाले लोग सकते में हैं। उन्हें समझ नहीं आ रहा है कि जब बिल्डर ये सब कर रहा था, तब प्रशासन ने क्यों नहीं रोका? उनका कहना है कि जब हमने जीवनभर की कमाई इसमें लगा दी, तब अचानक कार्रवाई करके हमारी नींद हराम कर दी। ‘भास्कर’ से चर्चा में लोग खुलकर तो नहीं बोल रहे, लेकिन यह जरूर कह रहे हैं कि वे कानूनी राय लेंगे और बिल्डर को भी तलब करेंगे।

रहने वालों का कसूर नहीं
एसडीओ विवेक श्रौत्रिय ने कहा कि प्रशासन भूखंड या फ्लैट लेने वालों की पीड़ा समझता है। नियमानुसार जितनी जगह पर अवैध निर्माण हुए हैं, उन्हें तोड़ा जाना चाहिए लेकिन चूंकि वहां रहने वालों का इसमें कोई कसूर नहीं है इसलिए सीधे जिम्मेदारों के खिलाफ एफआईआर की गई है।

आप प्लॉट या फ्लैट खरीद रहे हैं तो ये देखें
– नगर निगम या पंचायत, दोनों क्षेत्र में प्लॉट या फ्लैट खरीदते समय सर्च रिपोर्ट निकलवाकर देखना चाहिए। इससे स्वामित्व के बारे में स्थिति स्पष्ट हो जाएगी।
– यह भी देखना चाहिए कि संबंधित कॉलोनी या बिल्डिंग का क्षेत्रफल कितना है। कहीं नजूल या अन्य किसी की जमीन पर बिल्डर या कॉलोनाइजर ने अतिक्रमण कर तो निर्माण नहीं किया है।
– टीएंडसीपी से नक्शा पास है या नहीं।
– ग्रामीण क्षेत्रों में यह जांचना चाहिए कि संबंधित एसडीओ से डायवर्शन हुआ है या नहीं।
– कॉलोनाइजर को प्रशासन से विकास अनुमति मिली है या नहीं।
– नगर निगम क्षेत्र में मकान या फ्लैट लिया जा रहा है, तब भी टीएंडसीपी से मंजूर होना चाहिए।

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