Friday , 24 November 2017

धर्म-अध्यात्म

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adhyatma samachar

आज संत रविदास जी की जयंती है ,कोटि 2 प्रणाम

आज संत रविदास जी की जयंती है ,कोटि 2 प्रणाम

अब कैसे छूटे राम, नाम रट लागी | प्रभुजी तुम चन्दन हम पानी, जाकी अंग अंग बास समानि | प्रभुजी तुम घन बन हम मोरा, जैसे चितवत चन्द चकोरा | प्रभुजी तुम दीपक हम बाती, जाकी जोति बरै दिन ...

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रविदास के भक्तों का जमावड़ा

रविदास के भक्तों का जमावड़ा

वाराणसी। श्री गुरु रविदास जी का 636 वां जयंती समारोह 25 फरवरी को जन्म स्थल सीर गोवर्धनपुर में मनाया जाएगा। संत रविदास के भक्तों का जमावाड़ा बढ़ता जा रहा है। कई दिन पहले से ही गुरु ...

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अनशन पर है 81 वर्षीय एक संत गंगा-नर्मदा के लिए

अनशन पर है 81 वर्षीय एक संत गंगा-नर्मदा के लिए

(जबलपुर)-- गंगा के साथ मां नर्मदा और देश की प्रमुख नदियों की शुचिता और अविरल प्रवाह के लिए पिछले 22 दिन से अमरकंटक में अनशन पर रहे जीडी अग्रवाल उर्फ स्वामी ज्ञान प्रकाश सानंद (81) ...

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जोगिया रंग ने तोड़ा पूरब पश्चिम का भेद

जोगिया रंग ने तोड़ा पूरब पश्चिम का भेद

वाराणसी। काशी के घाट पूरी तरह जोगिया रंग में रंग आए। नख शिख भभूती लगाए-धूनी रमाए संन्यासियों के डेरे। इसे देशी श्रद्धालुओं के साथ ही विदेशी श्रद्धालु दिन भर घेरे रहे। जुहार लगाते- ...

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काशी विश्वनाथ मंदिर में नागा संन्यासियों की भीड़

काशी विश्वनाथ मंदिर में नागा संन्यासियों की भीड़

इलाहाबाद में चल रहे कुंभ से लौट रहे तीर्थयात्रियों की भीड़ देश के बारह ज्योतिर्लिंगों में एक काशी विश्वनाथ का दर्शन करने के लिए धार्मिक नगरी वाराणसी में एक बार फिर उमड़ रही है। बा ...

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‘लोमो’को कहते हैं चीन में भगवान राम

‘लोमो’को कहते हैं चीन में भगवान राम

चीन में रामायण का एक अलग ही रूप है। रामायण के हर पात्र के नाम वहां अलग है और चीन में राम कथा के मायने भी अलग हैं। 'दशरथ कथानम्' के अनुसार राजा दशरथ जंबू द्वीप के सम्राट थे और उनके ...

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रामेश्वरम्:भारत के तीर्थ

रामेश्वरम्:भारत के तीर्थ

भारत के चार धामों और बारह ज्योतिलिंगों में एक तमिलनाडु में स्थित रामेश्वरम् दक्षिण भारत का तीसरा सबसे बड़ा मंदिर है। शंखाकार रामेश्वरम् एक द्वीप है, जो एक लंबे पुल द्वारा मुख्य भू ...

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वृक्ष का मूल एक है और शाखाएं अनेकस्वामी अवधेशानंद

वृक्ष का मूल एक है और शाखाएं अनेकस्वामी अवधेशानंद

वृक्ष का मूल एक है और शाखाएं अनेक स्वामी अवधेशानंद गिरी॥ कोई भी एकता अनेकता से मुक्त नहीं होती। भारत जितना बड़ा देश है,उतनी ही उसमें विविधताएं हैं-अनेक प्रांत, भाषाएं, जातियां, सं ...

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