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मप्र में लाट साहब के आलाप का दमन? या विचार के जीवित होने का भय

May 28, 2016 6:04 pm by: Category: फीचर Comments Off A+ / A-

“आसाराम और रामदेव जैसे इंटिलेक्चुअल्स की जगह साराभाई और होमी जहांगीर को सम्मान और काम करने का मौक़ा दिया ये उनकी ग़लती थी, उन्होंने देश में गौशाला और मंदिर की जगह यूनिवर्सिटी खोली ये भी उनकी घोर ग़लती थी”.

160526182727_collector_ajay_singh_gangwar_transferred_over_nehru_praise_in_madhya_pradesh_336x189_facebook_nocreditये शब्द यदि किसी आम आदमी ने कहे होते या रोज कह ही रहा है तो इस नक्कारखाने में कोई नहीं सुनने वाला होता .लेकिन यह उदगार प्रगट कर दिए एक लाटसाहब ने.लाटसाहब यह बोले अतः सरकार का चौंकना और नाराज होना वाजिब था,अब वाजिब क्यों?भई सरकार जो ठहरी .लेकिन किसी की तारीफ़ से वह भी नेहरु की क्या फर्क पड़ता है सरकार को भई कुर्सी से अलग होने पर लाटसाहब भी तो एक राष्ट्रीय भावना से ओत-प्रोत भारतीय ही हैं.व्यक्तिगत मत की अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर उन्हें पूर्ण अधिकार है.लेकिन सरकार गुस्सा हो गयी और लाटसाहब को तुरंत पद से हटा दिया.

अजय गंगवार ने बुधवार को अपने फेसबुक पोस्ट में लिखा था, “ज़रा ग़लतियां बता दीजिए जो नेहरू को नहीं करनी चाहिए थी. अगर उन्होंने 1947 में आपको हिंदू तालिबानी राष्ट्र बनने से रोका तो यह उनकी ग़लती थी, उन्होंने आईआईटी, इसरो, आईआईएसबी, आईआईएम, भेल स्टील प्लांट, बांध, थर्मल पावर लाए ये उनकी ग़लती थी.”

सामान्य प्रशासन मंत्री लालसिंह आर्य ने इस पर आपत्ति की थी. उसके बाद से ही माना जा रहा था कि उन पर कार्रवाई की जाएगी.

लाल सिंह आर्य ने कहा था, “सिविल सेवा आचरण नियम का उल्लंघन नही किया जाना चाहिए. अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता सभी को लेकिन नियमों का भी पालन होना चाहिए.”

इससे पहले नरसिंहपुर के कलेक्टर सीबी चक्रवर्ती ने तमिलनाडु में जयललिता की जीत पर सोशल मीडिया में बधाई दे दी थी. उन्होंने भी विरोध के बाद अपनी पोस्ट को हटा लिया था.

दरअसल कांग्रेस मुक्त भारत का नारा देने वाली भाजपा का लोकतांत्रिक गणित कुछ अलग है लेकिन सत्ता पर काबिज रहने की नीति चीन से आयातित है.जिस तरह चीन में वामपंथियों ने सरकारी संस्थानों में अपने कारिंदे बैठा रखे हैं भाजपा के भी यही सोचना है की यदि सभी वैचारिक संस्थाओं में भाजपा के विचार से प्रभावित लोगों को बैठा दिया जाएगा तब सत्ता से भाजपा को हटा पाना असंभव हो जाएगा.इस तारतम्य में वर्षों से अपने कार्यकर्ताओं को चीन दौरे पर यह भारतीय राजनैतिक दल भेजता रहा है.इस क्रियाविधि में एक कलेक्टर द्वारा प्रगट इन विचारों से हंगामा मच गया विचारों ने यह प्रगट किया की भाजपा के विचारों को सभी हाँ कहने वाले नहीं हैं और इसे कांग्रेस के जीवित होने की आहट समझ अफरातफरी मच गयी और फलतः लाट साहब को हटा दिया गया.

यह सन्देश उन अधिकारीयों के लिए भी है जो लाट साहिबी का सुख भोग रहे हैं लेकिन उन्हें किस मूल्य पर वहां रहना है यह सरकार ने जता दिया है.अफसरों की अन्य किसी हरकतों पर कार्यवाही इतनी जल्दी नहीं होती या होती ही नहीं लेकिन यह तो उस विचार के जीवित होने का मामला है जिसे सरकार कुचला हुआ कमजोर मान रही है और उससे भारत को मुक्त करना चाहती है .

अनिल सिंह भोपाल से 

 

मप्र में लाट साहब के आलाप का दमन? या विचार के जीवित होने का भय Reviewed by on . [box type="info"]"आसाराम और रामदेव जैसे इंटिलेक्चुअल्स की जगह साराभाई और होमी जहांगीर को सम्मान और काम करने का मौक़ा दिया ये उनकी ग़लती थी, उन्होंने देश में गौश [box type="info"]"आसाराम और रामदेव जैसे इंटिलेक्चुअल्स की जगह साराभाई और होमी जहांगीर को सम्मान और काम करने का मौक़ा दिया ये उनकी ग़लती थी, उन्होंने देश में गौश Rating: 0
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