अगली पीढ़ी की सुरक्षा कंपनियों को साइबर हमले से बचाएगी

नई दिल्ली, 21 सितम्बर (आईएएनएस)। भारतीय कंपनियां जहां दुनिया भर में लोकप्रिय हो रही हैं, वहीं उन पर साइबर हमले का खतरा बढ़ता ही जा रहा है। क्योंकि यहां ज्यादातर कंपनियां पुराने घिसेपिटे सुरक्षा समाधानों का ही इस्तेमाल कर रही हैं। विशेषज्ञों ने यह चेतावनी दी है।

नई दिल्ली, 21 सितम्बर (आईएएनएस)। भारतीय कंपनियां जहां दुनिया भर में लोकप्रिय हो रही हैं, वहीं उन पर साइबर हमले का खतरा बढ़ता ही जा रहा है। क्योंकि यहां ज्यादातर कंपनियां पुराने घिसेपिटे सुरक्षा समाधानों का ही इस्तेमाल कर रही हैं। विशेषज्ञों ने यह चेतावनी दी है।

भारत में इंटरनेट प्रयोक्ताओं की संख्या पिछले साल 23.8 करोड़ थी, जो इस साल बढ़कर 36 करोड़ हो चुकी है। लेकिन इसके साथ ही साइबर सुरक्षा को लेकर चिंताएं भी बढ़ गई हैं।

सुरक्षा सॉफ्टवेयर और समाधान की विश्व की प्रमुख कंपनी ट्रेंड माइक्रो इंक के मुताबिक, 2016 की पहली छमाही में 180 भारतीय कंपनियां साइबर हमले का शिकार बनीं और उनसे ऑनलाइन फिरौती मांगी गई।

आईबीएम इंडिया/साउथ एशिया के क्लाउड प्रमुख विवेक मलहोत्रा ने कहा, “जैसे-जैसे भारतीय कंपनियां ऑनलाइन होती जा रही हैं और अपने रिकार्ड को ऑनलाइन रखने लगी हैं, उन पर साइबर हमले का खतरा बढ़ता जा रहा है। हाल ही में आईबीएम और पोनेमोन इंस्टीट्यूट के ‘कास्ट ऑफ डेटा ब्रीच : इंडिया’ में बताया गया कि भारत साइबर हमलों के निशाने पर है। अर्थव्यवस्था का डिजिटीकरण हो रहा है और साइबर हमले का जोखिम भी उसी रफ्तार से बढ़ता जा रहा है।”

इंटरनेशनल डेटा कॉरपोरेशन (आईडीसी) दक्षिण एशिया के प्रबंध निदेशक जयदीप मेहता ने आईएएनएस को बताया, “अब सिस्टम ज्यादा ओपेन हो गए हैं और संस्थानों के आंकड़े पारंपरिक सीमा से बाहर जाने लगे हैं। साइबर सुरक्षा काफी जरूरी हो गया है। यही तर्क सरकारी संस्थानों पर भी लागू होता है।”

कंपनियों से ऑनलाइन फिरौती वसूलने को रैनसमवेयर कहा जाता है और वैश्विक स्तर पर इससे कंपनियों को पिछले साल तीन अरब डॉलर का नुकसान हुआ। दुनिया के सबसे बड़े डेटा स्टोरेज बहुराष्ट्रीय कंपनी ईएमसी कॉरपोरेशन द्वारा जुलाई में कराए गए एक सर्वेक्षण से यह जानकारी मिली है कि भारतीय कंपनियों को रैनसमवेयर से पिछले एक साल में 10 लाख डॉलर की चपत लगी है।

ईएमसी के डेटा सुरक्षा समाधान की प्रबंधक रिपु बाजवा का कहना है, “संस्थान अब अपनी सुरक्षा पर ज्यादा ध्यान दे रहे हैं। लेकिन खतरा भी उतनी ही तेजी से बढ़ता जा रहा है। अब ज्यादा कंपनियां साइबर हमले का शिकार हो रही हैं।”

साइबर सुरक्षा समाधान मुहैया करानेवाली कंपनी टीएसी सिक्युरिटी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी तृष्णीत अरोड़ा का कहना है, “भारत में कंपनियां प्रौद्योगिकी पर आश्रित होती जा रही है। साल 2012, 2013, 2014 और 2015 में क्रमश: 371, 189, 155 और 128 कंपनियां साइबर हमले का शिकार बनीं। करीब 34 फीसदी भारतीय कंपनियों आईटी एनवायरोनमेंट पब्लिक क्लाउड पर हैं और इनमें से 60 फीसदी से ज्यादा संस्थानों का मानना है कि क्लाउड पर उनका आंकड़ा ज्यादा सुरक्षित नहीं है।”

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