अधिनायकवादी सरकारें प्रभुत्व कायम करने के लिए झूठ पर निर्भर रहती हैंः जस्टिस चंद्रचूड़

नयी दिल्लीः सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ ने शनिवार को कहा कि फेक न्यूज (फर्जी खबर) और झूठ से मुकाबले के लिए नागरिकों को यह सुनिश्चित करने का प्रयास करना चाहिए कि प्रेस किसी भी प्रभाव से मुक्त हो और निष्पक्ष तरीके से जानकारी मुहैया कराए.

जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा कि अधिनायकवादी (तानाशाही) सरकारें अपना प्रभुत्व कायम करने के लिए लगातार झूठ पर निर्भर रहती हैं. शनिवार को छठे एमसी छागला स्मृति व्याख्यान में लॉ कॉलेजों और विश्वविद्यालयों के छात्रों एवं संकाय सदस्यों और न्यायाधीशों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि सत्य तय करने की जिम्मेदारी सरकार पर नहीं छोड़ी जा सकती.

जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा, ‘यहां तक ​​कि वैज्ञानिकों, सांख्यिकीविदों, अनुसंधानकर्ताओं और अर्थशास्त्रियों जैसे विशेषज्ञों की राय हमेशा सच नहीं हो सकती, क्योंकि हो सकता है कि उनकी कोई राजनीतिक संबद्धता नहीं हो, लेकिन उनके दावे, वैचारिक लगाव, वित्तीय सहायता की प्राप्ति या व्यक्तिगत द्वेष के कारण प्रभावित हो सकते हैं.’

जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा, ‘फेक न्यूज या झूठी सूचना कोई नई प्रवृत्ति नहीं है और यह तब से है जब से प्रिंट मीडिया अस्तित्व में है, लेकिन प्रौद्योगिकी में तेज प्रगति और इंटरनेट की पहुंच के प्रसार के साथ ही यह समस्या और बढ़ गई है.’

जस्टिस चंद्रचूड़ ने ‘स्पीकिंग ट्रूथ टू पावरः सिटिजन्स एंड द लॉ’ विषय पर अपने संबोधन में कहा कि विचारों के ध्रुवीकरण के लिए सोशल मीडिया को दोषी ठहराया जाता है, लेकिन ऐसा करने से हमारे समुदायों के भीतर गहरे अंतर्निहित मुद्दों की अनदेखी होती है.

उन्होंने कहा कि इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता है कि फेक न्यूज की घटनाएं बढ़ रही हैं.

जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा कि अधिनायकवादी सरकारें प्रभुत्व कायम करने के लिए लगातार झूठ पर निर्भर रहती हैं.

उन्होंने कहा कि सत्ता से सच बोलने का नागरिकों का अधिकार लोकतंत्र को जीवंत रखने का अभिन्न हिस्सा है.

जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा, ‘सत्ता के लिए सच बोलना हर नागरिक का अधिकार माना जा सकता है, लेकिन लोकतंत्र में यह हर नागरिक का कर्तव्य है.’

उन्होंने सच के महत्व पर रोशनी डालने के लिए दार्शनिक हैना आरेंट को उद्धृत करते हुए कहा कि अधिनायकवादी सरकारें प्रभुत्व स्थापित करने के लिए लगातार झूठ पर निर्भर रहती हैं. लोकतंत्र और सत्य साथ-साथ चलते हैं. लोकतंत्र को जीवंत रहने के लिए सत्य की जरूरत है.

जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा कि सनसनीखेज खबरें अक्सर झूठ पर आधारित होती हैं और इनमें लोगों को आकर्षित करने की क्षमता होती है.

उन्होंने कहा कि अध्ययनों से पता चला है कि लोग ट्विटर पर झूठ के प्रति आसानी से प्रभावित हो जाते हैं.

जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा कि सरकार के झूठ को सामने लाना बौद्धिक लोगों का कर्तव्य है. फेक न्यूज से निपटने के लिए आम जनता को सार्वजनिक संस्थानों को मजबूत करना होगा और एक निष्पक्ष प्रेस सुनिश्चित करनी होगी, जो निष्पक्षता से जानकारी दे.

उन्होंने कहा, ‘सच्चाई का दावा करने वालों के लिए पारदर्शी होना उतना ही जरूरी है.’

उन्होंने स्कूलों और विश्वविद्यालयों का आह्वान करते हुए कहा कि वे सुनिश्चित करें कि छात्र सत्ता से सवाल करने का स्वभाव विकसित करें.जस्टिस ने कहा, ‘नागरिकों से मतलब सिर्फ कुलीन वर्ग से नहीं बल्कि महिलाओं, दलितों और हाशिये पर मौजूद समुदायों से हैं, जिनके पास ताकत नहीं है और जिनकी राय को सच्चाई का दर्जा नहीं दिया जाता.’

उन्होंने कहा, ‘उनके (हाशिये पर मौजूद समुदायों) पास अपनी राय को व्यक्त करने का अधिकार नहीं है, इसलिए उनके विचारों और रायों को सीमित कर दिया गया. ब्रिटिश राज के उन्मूलन के बाद उच्च जाति के पुरुषों की राय और उनके विश्वास को ही सत्य माना गया.’

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