वाशिंगटन, 6 जून (आईएएनएस)। अमेरिकी प्रसारक नेशनल पब्लिक रेडियो (एनपीआर) के पुरस्कारों से सम्मानित फोटो पत्रकार डेविड गिल्की की रविवार को अफगानिस्तान में हत्या कर दी गई।
एनपीआर की प्रवक्ता इसाबेल लारा ने एक बयान में बताया कि गिल्की (50) हेलमंड प्रांत में अफगानिस्तानी सेना की यूनिट के साथ जा रहे थे। इस दौरान सेना के काफिले पर गोलीबारी हुई जिसकी चपेट में उनका वाहन भी आ गया।
समाचार एजेंसी एफे न्यूज के अनुसार अफगानिस्तानी अनुवादक जबीहउल्ला तमन्ना (38) भी हमले में मारे गए।
एक अन्य वाहन में सवार एनपीआर के दो अन्य पत्रकार टॉम बोमैन और मोनिका इव्स्तातीवा बाल-बाल बच गए।
तमन्ना भी पहले फोटो पत्रकार के रूप में काम कर चुके थे।
गिल्की दुनिया के श्रेष्ठ फोटो पत्रकारों में एक माने जाते थे। उन्हें 2010 में जॉर्ज पोल्क पुरस्कार, 2007 में एम्मी पुरस्कार समेत कई पुरस्कार और ह्वाइट हाउस न्यूज फोटोग्राफर एसोसिएशन की ओर से दर्जनों सम्मान मिले थे।
अमेरिका के विदेश मंत्री जॉन केरी ने डेविड को ‘प्रतिभाशाली कहानीकार’ बताते हुए कहा, “यह हमला उस भयावह खतरे की याद दिलाता है जिसका अफगानिस्तान के लोग, अफगानिस्तानी सुरक्षा बल और निडर पत्रकार सामना कर रहे हैं।”
एनपीआर के वरिष्ठ उपाध्यक्ष माइकेल ओरेस्केस ने कहा, “डेविड 9/11 की घटना के बाद से ही इराक और अफगानिस्तान में युद्ध और संघर्ष को कवर कर रहे थे। इन युद्धों को देखने के बाद वह लोगों की मदद करने के लिए प्रतिबद्ध हुए थे। वह अपनी प्रतिबद्धता पूरी करने के दौरान काल के गाल में समा गए।”
कमेटी टू प्रोटेक्ट जर्नलिस्ट्स (सीपीजे) के अनुसार सन 1992 से अफगानिस्तान में 27 पत्रकारों की मौत हो चुकी है।
सीपीजे ने कहा कि सन 1992 से अब तक दुनिया भर में मारे गए पत्रकारों में 90 प्रतिशत स्थानीय थे, जबकि इसी अवधि में अफगानिस्तान में मारे गए पत्रकारों में 75 प्रतिशत विदेशी थे।
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