इस्लामाबाद, 17 मई (आईएएनएस)। अफगानिस्तान शांति वार्ता को लेकर एक तरफ जहां चतुष्पक्षीय समन्वयन समूह (क्यूसीजी) ने पाकिस्तान की राजधानी में बैठक की तैयारी पूरी कर ली है, वहीं दूसरी ओर इस्लामाबाद का मानना है कि राजनीतिक समझौता ही दीर्घकालिक समस्या का समाधान है।
अफगानिस्तान, पाकिस्तान, चीन तथा अमेरिका के बीच बुधवार को होने वाली बैठक बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है, क्योंकि वार्ता की मेज पर आने से तालिबान के इंकार के बाद काबुल उसके खिलाफ कार्रवाई का दबाव बढ़ा रहा है।
इस्लामाबाद में काबुल के शीर्ष राजनयिक उमर जाखिलवाल ने क्यूसीजी समूह से तालिबान के रुख को समझौते के अयोग्य करार देने की घोषणा का सुझाव दिया है।
अफगानिस्तान में शांति व सुलह के लिए दिसंबर में अस्तित्व में आया क्यूसीजी, तालिबान से किस प्रकार निपटा जाए, इसे लेकर समूह के सदस्यों के विचारों में विभिन्नता को लेकर कठिन परिस्थितियों का सामना कर रहा है।
इस बात को लेकर कोई संदेह नहीं है कि अमेरिका व नाटो गठबंधन पूर्ण सैन्य क्षमता के साथ लगभग 1.6 लाख सैनिकों की मौजूदगी के बावजूद बीते 14 वर्षो के दौरान समस्या का समाधान करने में नाकाम रहा है। यदि यह लड़ाई जारी रही तो और अफगानी मारे जाएंगे।
अफगानिस्तान की सरकार तालिबान की हिंसा को लेकर चिंतित है। किसी भी सरकार के लिए वह पल बेहद कठिन होगा, जब उसके सशस्त्र विरोधियों द्वारा उसके सुरक्षाबलों व लोगों की नृशंसता से हत्या हो रही हो और वह उससे मुकाबले के बजाय बातचीत करने के लिए बैठे।
सरकार हालांकि तालिबान के साथ सुलह के लिए अपनी नीति को बदलने को लेकर दबाव में है। पर्यवेक्षकों के मुताबिक, राजनीतिक विकल्प को बिल्कुल भी खारिज नहीं किया जा सकता।
अफगानिस्तान के अधिकांश संगठनों ने एक अन्य विरोधी आंदोलन हिज्ब-ए-इस्लामी अफगानिस्तान से वार्ता के लिए पूरी ताकत झोंक दी है।
वार्ता में दोनों तरफ से प्रगति देखी गई है और कुछ सप्ताहों के अंदर एक शांति समझौते पर हस्ताक्षर होना तय माना जा रहा है, जिसके बाद तालिबान को लड़ाई की अपनी नीति की समीक्षा करनी पड़ सकती है।
पाकिस्तान के विदेश मामलों के सलाहकर सरताज अजीज ने पिछले सप्ताह कहा कि वाशिंगटन व काबुल पर इस्लामाबाद इस बात का दबाव डाल रहा है कि सुलह प्रक्रिया को निष्पक्ष मौका और अधिक समय देने की जरूरत है।
अजीज ने कहा कि अगर समझौते का प्रयास पूरी तरह विफल हो जाता है, तो समझौता न करने वाले तत्वों को निशाना बनाया जा सकता है।
जाखिलवाल ने सोमवार को इस्लामाबाद में कहा, “अब चूंकि तालिबान ने वार्ता में शामिल होने से सार्वजनिक तौर पर इंकार कर दिया है और अधिक से अधिक हिंसा फैलाने की राह चुनी है, तो दूसरा रास्ता खुला है।”
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