काबुल, 16 जनवरी (आईएएनएस)। अफगानिस्तान की सीनेट के सदस्यों ने राष्ट्रपति अशरफ गनी से हाई पीस काउंसिल (एचपीसी) को भंग करने की मांग की है। सांसदों की यह मांग इसके पूर्व सलाहकार अब्दुल हाकिम मुजाहिद की असंवेदनशील टिप्पणी के बाद सामने आई है।
तोलो न्यूज की एक रिपोर्ट के मुताबिक, मुजाहिद ने पिछले सप्ताह कहा था कि तालिबान शांति के दूत हैं और एक पवित्र समूह हैं।
मुजाहिद को रविवार को एचपीसी के सलाहकार पद से बर्खास्त कर दिया गया।
सांसदों ने रविवार को तर्क देते हुए कहा कि एचपीसी शांति प्रक्रिया में कोई खास योगदान देने में नाकाम रही है और देश पर वित्तीय बोझ अलग से बनी हुई है। उन्होंने यह भी कहा कि एचपीसी के गैर जिम्मेदार सदस्यों के खिलाफ मुकदमा चलाना चाहिए।
सीनेटर राणा तरीन ने कहा, “एचपीसी को निरस्त करने को लेकर हमने सशस्त्र सेना के सर्वोच्च कमांडर से मुलाकात की है। हमारा कहना है कि इस पर खर्च होने वाला धन सुरक्षा बलों के लिए इस्तेमाल हो।”
तरीन ने कहा, “आज की तारीख में देश के हालात को लेकर दुकानदार, गरीब व मजदूर सहित तमाम लोग चिंतित हैं और वे चाहते हैं कि सरकार समस्या के समाधान की दिशा में काम करे।”
तोलो न्यूज की एक रिपोर्ट के मुताबिक, संसद के उच्च सदन ने रविवार को देश के संपूर्ण हालात तथा तालिबान द्वारा हेलमंड तथा काबुल में हमले व कंधार अतिथिगृह में बम विस्फोट सहित हाल की हिंसा की घटनाओं पर चर्चा की।
बीती 10 जनवरी को तालिबान के दो फिदायीन हमलावरों द्वारा अफगानिस्तान संसद के कर्मचारियों को निशाना बनाकर किए गए हमले में 50 से अधिक लोगों की मौत हो गई, जबकि 150 से अधिक लोग घायल हो गए।
मुजाहिद ने तालिबान का बचाव करते हुए कहा था, “तालिबान एक पवित्र संगठन है, जिसने रूस के खिलाफ लड़ा और उसे हराया, जिसके बाद गृह युद्ध खत्म हुआ और देश में सुरक्षा बहाल हुई।”
मुजाहिद की टिप्पणी की अफगानिस्तान में व्यापक स्तर पर आलोचना की गई है।
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