नई दिल्ली, 1 फरवरी (आईएएनएस)। वित्त मंत्री अरुण जेटली ने बुधवार को संसद में वित्त वर्ष 2017-18 का बजट प्रस्तुत किया, जिसमें कल्याण योजनाओं को ज्यादा धन आवंटित किया गया तथा व्यक्तिगत आयकर और छोटी कंपनियों के आयकर में मामूली राहत दी गई तथा वित्तीय घाटे को सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के 3.2 फीसदी तक रखने का लक्ष्य निर्धारित किया गया। उद्योग जगत ने स्वागत किया है।
पेटीएम के संस्थापक और मुख्य कार्यकारी विजय शेखर शर्मा ने कहा, “यह एक डिजिटल अर्थव्यवस्था का बजट है। एक छोटी दुकान से उपभोक्ता तक प्रत्येक व्यक्ति को डिजिटल अर्थव्यवस्था की ओर बढ़ावा दिया गया है। डिजिटल भुगतान का प्रयोग करने के लिए कर लाभ, प्रोत्साहन और डिजिटल फुटप्रिंट के आधार पर ऋण बढ़ाने से डिजिटल भुगतानों के लिये एक बड़े व्यापारिक इकोसिस्टम का निर्माण होगा। घरेलू कामों, खेती और डेयरी सहित ज्यादा श्रमिकों वाले क्षेत्रों के लिए प्रोत्साहन से एसएमई को नई नौकरियों के सृजन में मदद मिलेगी। बैंक एनपीए के साथ ही बढ़ते बैंक के पूंजीकरण पर फोकस करना और ध्यान देना देश में वित्तीय प्रणाली को मजबूत करने की ओर एक बड़ा कदम है।”
नैटहेल्थ के महासचिव अंजन बोस का कहना है, “वित्त मंत्री का बजट स्पष्ट रूप से सुविधाओं से वंचितों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं मुहैया कराने और ‘निवारक और स्वास्थ्यलाभ’ पर केन्द्रित है, जिनमें से दोनों ही काफी प्रोत्साहक हैं। स्वास्थ्य उप-केन्द्रों को स्वास्थ्य लाभ केन्द्रों में परिवर्तन करने का लक्ष्य भारतीय नागरिकों के लिए समय की मांग के समान है।”
पैनासोनिक इंडिया के सीईओ मनीष शर्मा ने कहा, ” अप्लायंसेस एवं कंज्यूमर इलेक्ट्रानिक्स उद्योग के मामले में इसका और विश्लेषण किए जाने की जरूरत है। इस बजट में वित्तमंत्री द्वारा ग्रामीण अर्थव्यवस्था एवं बुनियादी ढांचे के लिए आवंटन पर ज्यादा बल दिया गया है। कंज्यूमर इलेक्ट्रानिक्स कंपनी की दृष्टि से हमें भारत में सप्लाई चेन एवं लाजिस्टिक्स में सुधार के लिए दिशानिर्देशों की उम्मीद थी। बजट में एमएसआईपी एवं ईपीएफ के लिए किया गया आवंटन प्रगतिशील है और इससे उद्योग में आयात पर निर्भरता कम होगी। हम जीएसटी के अगले मसौदे के लिए आशान्वित हैं। हालांकि सरकार द्वारा देश में आयात किए जाने वाले मोबाइल फोन्स में प्रयुक्त प्रिंटेड स*++++++++++++++++++++++++++++र्*ट बोर्ड (पीसीबी) पर 2 प्रतिशत का अतिरिक्त कर लगाने से घरेलू उद्योग को पर्याप्त सुरक्षा मिलेगी और जीएसटी प्रणाली के तहत मेक-इन-इंडिया को आवश्यक बल मिलेगा।”
क्लिअरटैक्स.कॉम के संस्थापक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी अर्चित गुप्ता ने बजट पर अपनी प्रतिक्रिया में कहा, “वित्त मंत्री ने छोटे और मध्यम व्यापारों के लिए लेखापरीक्षा और बहीखाते के नियमों सहित, कर नियमों में व्यापक सुधारों की घोषणा की है। यह छोटे करदाताओं के बीच अनुपालन को तेज करने के लिए सीमित है। हम उन व्यापारों के लिये इसका समर्थन करते हैं जिन्होंने विमुद्रीकरण के कारण व्यापार में घाटा सहा है।”
एएमएचएसएससी के अध्यक्ष डॉ ए. शक्तिवेल ने कहा, “पूरे देश भर में 100 अंतर्राष्ट्रीय कौशल केन्द्र और सभी राज्यांे में 600 कौशल केन्द्र खोलने से देश के विकास में काफी बढ़त मिलेगी। अपेरल सेक्टर में भी इन कौशल केन्द्र के खोलने के बाद प्र्याप्त मात्रा में स्किल्ड लेबर उपलब्ध होगी, जिससे अपेरल सेक्टर को स्किल लेबर की कमी से भविष्य में जुझना नहीं पड़ेगा। इन केन्द्रों से 2020 तक 40 करोड़ युवाओं को स्किल करने का लक्ष्य मंे भी सहायता मिलेगी।”
इंडियन इलेक्ट्रिकल एंड इलेक्ट्रॉनिक्स मैनुफैक्चर्स एसोसिएशन (आईईईएमए) के अध्यक्ष संजीव सरदाना ने बजट का स्वागत करते हुए कहा, “दीनदयाल ग्राम ज्योति योजना और एकीकृत बिजली विकास योजना में आवंटन बढ़ाने से इस क्षेत्र को बढ़ावा मिलेगा। 50 करोड़ से कम कारोबार करने वाली कंपनियों को 5 फीसदी कर छूट स्वागत योग्य कदम है।”
आईईईएमए के महानिदेशक सुनील मिश्रा ने कहा, “चुनावी साल को देखते हुए इस बजट को लोकलुभावन नहीं कहा जा सकता। चुनावी चंदा और कर अनुपालन पर साहसिक फैसला एक स्वागतयोग्य कदम है। व्यक्तिगत आयकर पर ज्यादा छूट की उम्मीद थी, लेकिन मामूली राहत दी गई।”
टाइम्स नेटवर्क के प्रबंध निदेशक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी एम. के. आनंद ने कहा, “नोटबंदी के बाद मेरी अपेक्षा कुछ अतिवादी सुधार की थी। लेकिन मुझे थोड़ी निराशा हुई है। हालांकि मनरेगा और कृषि क्षेत्र के लिए अधिक धन के आवंटन का सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। कृषि और रियल एस्टेट क्षेत्र में ही सबसे ज्यादा रोजगार पैदा होते हैं।”
नेशनल रेस्टोरेंट एसोसिएशन ऑफ इंडिया के अध्यक्ष और इंप्रेसारियो इंटरटेनमेंट एंड हास्पिटिलीटी प्रा. लि. के मुख्य कार्यकारी अधिकारी और प्रबंध निदेशक रियाज अमलानी ने कहा, “एनआरएआई इंडिया फूड सर्विसेज रिपोर्ट 2016 के मुताबिक देश का खाद्य सेवाओं का बाजार 3,09,110 करोड़ रुपये का है जो रेलवे का 1.6 गुणा और होटल उद्योग का 8 गुणा है। इसमें 58 लाख लोगों को रोजगार मिलता है और यह अर्थव्यवस्था में कर के रूप में 22,400 करोड़ रुपये का योगदान करता है। उद्योग को कर में छूट की उम्मीद है तथा व्यापार में आसानी के लिए और लाइसेंस में आसानी के लिए नीति में बदलाव की उम्मीद है।”
हिन्दुजा समूह के सहअध्यक्ष गोपीचंद हिंदुजा ने बताया, “बजट का लक्ष्य अर्थव्यवस्था को अधिक पारदर्शी और प्रतिस्पर्धी बनाना है। नोटंबदी के कारण बाजार प्रभावित होने के बावजूद अर्थव्यव्सथा में 8 से 10 फीसदी का विकास दर प्राप्त करने की क्षमता है। राजनीतिक चंदे पर नियमन अच्छा प्रस्ताव है। एफआईपीबी को हटाने से भारत में व्यापार में आसानी होगी।”
अनमोल बेकर्स के प्रबंध निदेशक गोविंद राम चौधरी ने कहा, “आयकर में 5 से 10 फीसदी तक छूट मिलने से लोगों की व्यक्गित प्रयोज्य आय बढ़ेगी। इससे निवेश और अर्थव्यवस्था को बढ़ावा मिलेगा। हालांकि सरकार ने वित्तीय घाटे के पहले निर्धारित लक्ष्य को बढ़ा कर 3.2 फीसदी कर दिया है।”
मैक्रोमैक्स इंफरेमेटिक्स के सहसंस्थापक राजेश अग्रवाल ने कहा, “बजट में ग्रामीण अर्थव्यवस्था के साथ डिजिटलीकरण और सुधारों पर जोर दिया गया है जो भारत के डिजिटल अर्थव्यवस्था बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। इसमें स्मार्टफोन की अहम भूमिका है।”
उत्पादन क्षेत्र की कंपनी डेलोइट टच तोहमात्सु इंडिया एलएलपी के भागीदार कुमार कांडास्वामी का कहना है, “उम्मीद के मुताबिक बजट में अवसंरचना, रेलवे, हाउसिंग और रक्षा क्षेत्र के लिए आवंटन में बढ़ोतरी की गई है, जिससे उत्पादन क्षेत्र में मांग बढ़ेगी। इससे वाणिज्यिक वाहनों, निर्माण उपकरणों और पूंजीगत वस्तुओं की मांग में बढ़ोतरी होगी।”
अलंकित लि. के प्रबंध निदेशक अंकित अग्रवाल का कहना है, “आम बजट 2017-18 आर्थिक और नीतिगत सुधारों के ²ष्टिकोण से प्रगतिशील बजट है। इसमें मुख्य जोर शासन प्रणाली को डिजिटल सक्षम बनाने, पारदर्शिता लाने, युवाओं को कुशल बनाने, अधिक रोजगार के अवसर पैदा करने, छोटे उद्योगों को प्रोत्साहित करने और शिक्षा और व्यवसाय के क्षेत्र में नवाचार और गुणवत्ता में सक्षम करने और वित्तीय क्षेत्र को पुनर्जीवित करने पर जोर दिया गया है।”
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