आयकर विभाग के पास रियल्टी कंपनियों की कर अदायगी सुनिश्चित करने का तंत्र नहीं : कैग

नई दिल्ली, 12 फरवरी (आईएएनएस)। कई रियल एस्टेट कंपनियां कर नहीं चुकाती हैं, क्योंकि आयकर विभाग (आईटी) के पास ऐसा कोई तंत्र नहीं है जो यह सुनिश्चित करे कि सभी पंजीकृत कंपनियों के पास पैन कार्ड हों और वे आयकर रिटर्न नियमित रूप से दाखिल करें। भारत के नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक (कैग) ने रियल एस्टेट क्षेत्र के प्रदर्शन लेखा-परीक्षा में यह जानकारी दी है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि आयकर विभाग ने अन्य थर्ड पार्टी डेटा या सर्वेक्षण आंकड़ों का प्रभावी इस्तेमाल नहीं किया, जिससे रियल एस्टेट क्षेत्र का कर आधार बढ़ाया जा सके।

‘रियल एस्टेट क्षेत्र के निर्धारितियों की आकलन’ रपट मंगलवार को सदन पटल पर रखी गई, जिसमें बताया गया है कि बिक्री को कम दिखाने से इस क्षेत्र में बड़े पैमाने पर काला धन पैदा हो रहा है।

रपट में कहा गया है, “आम तौर पर कर-चोरी के ²ष्टिकोण से उच्चतम जोखिम श्रेणी के अंतर्गत गैर-पैन लेन-देन की निगरानी करने को आयकर विभाग ने उचित महत्व नहीं दिया, और विशेष रूप से रियलिटी सेक्टर के लेन-देन में खासतौर से कर चुकाया गया या नहीं, यह जांचने का कोई तंत्र नहीं है। आयकर विभाग के पास ऐसे किसी तंत्र की कमी है, जो यह सुनिश्चित कर सके कि जिन लोगों ने अचल संपत्ति का उच्च मूल्य पर लेन-देन किया है, क्या उन्होंने इसके लिए कैपिटल गेन टैक्स चुकाया है।”

कैग ने यह भी कहा है कि आयकर अधिनियम की धारा 80-आईबी (10) के तहत आवासीय परियोजनाओं के निर्माण से प्राप्त मुनाफे पर कुछ स्थितियों में 100 फीसदी का छूट प्राप्त है, जिसका अपात्र और अनपेक्षित समूहों द्वारा गलत फायदा उठाया जा रहा है।

कैग ने कहा, “आवासीय इकाइयों के आकार या सामथ्र्य के आधार पर सरकार द्वारा आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों या निम्न आय वर्ग के लिए आवास परियोजनाओं को वर्गीकृत करने के लिए कई सारे मानदंड रखे गए हैं।”

रपट में कहा गया है, “धारा 80-आईबी (10) के तहत कटौती की अनुमति देने के लिए शर्तों को कमजोर तरीके से लागू किया गया, जिससे गैर-पात्र व्यक्तियों/अनपेक्षित समूहों द्वारा इसका लाभ उठाया जा रहा था। इस प्रकार लक्षित समूह लाभान्वित नहीं हो सका और सरकार को साल दर साल राजस्व का नुकसान हुआ और अनपेक्षित लोग इसका फायदा उठाते रहे।”

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