इस्लामाबाद, 26 जुलाई (आईएएनएस)। पाकिस्तान सरकार ने अपने एक नागरिक जुल्फिकार अली को बचाने के लिए राजनयिक प्रयास तेज कर दिए हैं। इंडोनेशिया में नशीली दवा से संबंधित मामले में अपराध सिद्ध होने के बाद अली को फांसी दी जाने वाली है।
अधिकारियों के अनुसार प्रधानमंत्री के विदेश मामले के सलाहकार सरताज अजीज आसियान (दक्षिण पूर्व एशियाई देशों के संगठन) की एक बैठक में भाग लेने के लिए लाओस गए हुए हैं। उन्होंने अपने इंडोनेशियाई समकक्ष रेत्नो मरसूदी से इस मुद्दे पर बातचीत के लिए समय मांगा है।
इस बीच विदेश मंत्रालय ने प्रत्याशित फांसी के मुद्दे पर चिंता जताने के लिए इंडोनेशियाई राजदूत इवान सुयुधी अमरी को समन किया।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता नफीस जकरिया ने समाचार पत्र डॉन की वेबसाइट से कहा, “मंत्रालय ने इस्लामाबाद में इंडोनेशियाई राजदूत को बुलाया और उन्हें पाकिस्तान सरकार की चिंता से अपने अधिकारियों को अवगत कराने के लिए कहा गया।”
बारह साल जेल में बिताने के बाद अली को इंडोनेशिया में फांसी दी जानी है।
एक मानवाधिकार विधि प्रतिष्ठान, जस्टिस प्रोजेक्ट पाकिस्तान (जेपीपी) ने राष्ट्रपति मम्नून हुसैन से एक ‘निर्दोष पाकिस्तानी’ की जान बचाने के लिए इंडोनेशियाई सरकार के समक्ष इस मामले को उठाने का निवेदन किया है।
जकार्ता में अली (52) को साल 2004 में 300 ग्राम हेरोइन के साथ गिरफ्तार किया गया था। इस मामले में सह अभियुक्त गुरदीप सिंह, अली के खिलाफ अपने बयान से यह कह कर मुकर गया था कि स्वीकारोक्ति के लिए उसे मजबूर किया गया था।
डॉन की वेबसाइट के अनुसार जेपीपी का कहना है, “बावजूद इसके (गुरदीप के बयान के) जकार्ता में पाकिस्तानी दूतावास को एक अधिसूचना मिली है कि अली को निकट भविष्य में फांसी दी जाएगी और परिवार को 72 घंटे का नोटिस दिया जाएगा।”
जेपीपी का कहना है कि इंडोनेशिया की पुलिस ने अली पर इतना जुल्म किया कि उसे वही कहने पर मजबूर होना पड़ा जो पुलिस चाहती थी। उसे इस तरह पीटा गया कि उसके पेट और गुर्दे का इलाज कराना पड़ा।
अली की पत्नी सिती रूहानी की अंतिम उम्मीद पाकिस्तान सरकार पर टिकी है।
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