पाकिस्तानी मीडिया में ‘उच्चपदस्थ राजनयिक सूत्रों’ के हवाले से यह खबर भी आई है कि भारत और पाकिस्तान के विदेश सचिवों की 15 जनवरी को होने वाली वार्ता भारत द्वारा आगे के लिए टाली जा सकती है।
पाकिस्तानी मीडिया में ‘उच्चपदस्थ राजनयिक सूत्रों’ के हवाले से यह खबर भी आई है कि भारत और पाकिस्तान के विदेश सचिवों की 15 जनवरी को होने वाली वार्ता भारत द्वारा आगे के लिए टाली जा सकती है।
पठानकोट हमले से जुड़े कथित पाकिस्तानी तार की जांच के लिए पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ के निर्देश पर गठित संयुक्त जांच दल (जेआईटी) ने अपनी शुरुआती रपट सौंप दी है।
द न्यूज इंटरनेशनल की रपट में सोमवार को कहा गया, “सूत्रों के अनुसार, भारतीय प्रशासन को जांच रपट सौंप दी गई है।”
रपट में कहा गया है कि भारतीय अधिकारियों ने आतंकवादियों और उनके आकाओं तथा परिवारिक सदस्यों के बीच पठानकोट वायुसेना अड्डे से टेलीफोन पर हुई बातचीत के ब्योरे पाकिस्तान को मुहैया कराए हैं।
भारत ने वे टेलीफोन नंबर भी उपलब्ध कराए हैं, जिन पर आतंकवादियों ने काल की थीं।
भारत का कहना है पंजाब में घुस कर दो जनवरी को भारतीय वायुसेना अड्डे पर जिन आतंकवादियों ने हमला किया था, वे प्रतिबंधित संगठन जैश-ए-मोहम्मद से संबद्ध थे।
रपट में बिना नाम वाले सूत्रों के हवाले से कहा गया है कि भारत द्वारा उपलब्ध कराए गए टेलीफोन नंबर पाकिस्तान में पंजीकृत नहीं हैं।
रपट में कहा गया है, “जांच एजेंसियां पठानकोट के हमलावरों से संबंधित जानकारियों की आगे जांच कर रही हैं।”
मीडिया की सोमवार की रपट में बताया गया कि पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी, इंटर सर्विसिस इंटेलिजेंस (आईएसआई) और सैन्य खुफिया शाखा पठानकोट के वायुसेना अड्डे पर हुए आतंकी हमले से जुड़े कथित पाकिस्तानी तार की जांच में मदद कर रही है।
‘द एक्सप्रेस ट्रिब्यून’ की रपट के मुताबिक, प्रधानमंत्री नवाज शरीफ के निर्देश पर गठित संयुक्त जांच दल (जेआईटी) में सैन्य खुफिया शाखा और खुफिया ब्यूरो शामिल हैं।
रपट में कहा गया है कि जेआईटी के गठन का फैसला ‘कुछ दिन पहले’ शरीफ की अध्यक्षता में हुई एक उच्चस्तरीय बैठक में लिया गया था।
पाकिस्तान की समाचार रपटों में शुक्रवार को बताया गया था कि शरीफ ने भारत की तरफ से पठानकोट हमले से जुड़े पाकिस्तानी आतंकियों के बारे में दिए गए सबूतों की जांच करने का निर्देश इंटेलिजेंस ब्यूरो को दिया था।
प्रधानमंत्री नवाज शरीफ से जुड़े एक सूत्र ने कहा है, “नवाज पठानकोट मामले की तह तक पहुंचने के लिए सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। उन्होंने इस मुद्दे पर सेना प्रमुख जनरल राहील शरीफ से भी बात की और जेआईटी के गठन पर उन्हें भी साथ लिया।”
रपट में कहा गया है कि नवाज ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से वादा किया है कि पाकिस्तान मामले की जांच करेगा और इसके नतीजों को सार्वजनिक करेगा।
लेकिन पाकिस्तानी अधिकारियों ने मीडिया से कहा है कि भारत द्वारा दी गई जानकारी पर्याप्त नहीं है और न्यायालय में यह टिक नहीं पाएगी।
द न्यूज इंटरनेशनल ने ‘उच्चपदस्थ राजनयिक सूत्रों’ के हवाले से बताया है कि भारत और पाकिस्तान के विदेश सचिवों की 15 जनवरी को होने वाली वार्ता भारत द्वारा आगे के लिए टाली जा सकती है। भारतीय विदेश सचिव के इस्लामाबाद आने के सिलसिले में अभी तक कोई भी जानकारी नहीं दी गई है।
अखबार ने लिखा है कि इस बात के आसार हैं कि भारत वार्ता को टालने का ऐलान आखिरी क्षणों में करे।
अखबार ने बताया है कि पठानकोट हमले के बाद से दोनों देशों के बीच विदेश सचिव स्तर की वार्ता पर कोई भी बात नहीं हुई है।
अखबार ने लिखा है कि पाकिस्तान नहीं चाहता कि वार्ता टले। इस बातचीत से समग्र वार्ता की बुनियाद पड़ेगी जिसमें तमाम मसलों पर बात हो सकेगी। इनमें कश्मीर का मसला भी शामिल है।
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