मंत्रालय की प्रवक्ता मारिया जखारोवा ने संवाददाताओं से कहा, “वस्तुत: हालात नियंत्रण से बाहर हो गए हैं। ऐसा प्रतीत होता है कि इसकी एकमात्र वजह इस घटना का व्यापक चरित्र ही नहीं है, बल्कि जटिल व लंबे समय से चली आ रही इस समस्या के समाधान के लिए व्यावहारिक उपाय अपनाने पर ईयू में सहमति न होना भी है।”
उन्होंने कहा कि इसीलिए ईयू के सदस्य देशों के प्रयास व्यावहारिक तौर पर निर्थक साबित हो रहे हैं।
जखारोवा ने कहा, ” हमने इन लोगों की सहायता के लिए यूरोपीय राजनीतिज्ञों को बड़ी-बड़ी बयानबाजी करते सुना है, लेकिन दुर्भाग्य की बात है कि ये बयानबाजी बस जुमले रह गए।”
ईयू देशों के आंतरिक मंत्रियों द्वारा शरणार्थी संकट पर 22 सितंबर को एक बैठक करने की संभावना है।
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