ईरान : महिलाओं की वेशभूषा पर नजर रखेगा गश्ती दल

imagesतेहरान-| ईरानी महिलाओं को पूरा शरीर ढककर घर से बाहर निकलने के लिए मजबूर करने के लिए एक ईरानी अर्धसैनिक समूह ने गश्ती दल का गठन किया है। गर्मी के मौसम में आधुनिक ईरानी महिलाएं ज्यादा पारदर्शी नकाब और छोटे बाजू वाले कपड़े पहनने पर जोर देती हैं।

महिलाओं का यह पहनावा रूढ़िवादी संगठनों को रास नहीं आ रहा था। उनकी मांग थी कि महिलाएं इस्लामिक परंपरा वाले पूरा शरीर ढकने वाले हिजाब पहनकर ही घर से बाहर निकलें।

ईरान का अंसार-ए-हिजबुल्ला समूह रूढ़िवादी संगठनों से एक कदम आगे निकल गया है। उसने इस्लामिक वेशभूषा न मानने वाली महिलाओं खासकर युवा महिलाओं की पहचान करने के लिए गश्ती दल का गठन किया है।

प्रमुख नेता आयतोल्ला अली खामनेई के समर्थन वाले अर्धसैनिक समूह ने दावा किया है कि उसने ऐसे दर्जनों समूहों को प्रशिक्षण दिया है और गश्ती करने का हुक्म दिया है।

गश्ती दल में मौजूद तीन हजार महिलाएं व एक हजार पुरुष उन महिलाओं को चेतावनी देने का काम करेंगे, जो उनके अनुसार, इस्लामिक गणराज्य के लिए आवश्यक शालीनता के नियमों का उल्लंघन करती पाई जाएंगी।

राष्ट्रपति रूहानी ने चुनाव के पहले लोगों से वादा किया था कि वह सामाजिक स्वतंत्रता प्रदान करेंगे और उनके राज में कोई भी फैसला लोगों पर थोपा नहीं जाएगा। इसके ठीक बाद कट्टरवादी समूह की यह कार्रवाई सामने आई है।

अंसार-ए-हिजबुल्ला के महासचिव अब्दुल हामिद मोहताशम ने कहा, “भ्रष्टाचार फैलाने वालों को कुचलना आवश्यक है।”

तेहरान की 29 वर्षीय महिला ने कहा, “यह धार्मिक तानाशाही है।”

उनकी 26 वर्षीय सहपाठी शर्शानी का कहना है, “इस तरह के कृत्य से लोगों के प्रति आदर न होने का पता चलता है।”

उन्होंने कहा, “हर व्यक्ति को अपनी पसंद की वेशभूषा चुनने का अधिकार होना चाहिए।”

पर्यटन कंपनी के लिए काम करने वाली फातिमा ने कहा, “अन्य मुस्लिम देश जैसे तुर्की में कुछ महिलाएं नकाब पहनती हैं, जबकि कुछ नहीं।”

उन्होंने कहा, “इसका मतलब यह नहीं कि नकाब नहीं पहनने वाली महिलाओं को वहां हेय दृष्टि से देखा जाता है। लेकिन यहां वैसी महिलाओं को नफरत भरी निगाहों से देखा जाता है। केवल इसलिए कि हम सज-धज कर रहती हैं।”

सैद्धांतिक रूप से घर से बाहर हमें बालों को ढककर रखना होता है, जबकि हम ऐसा नहीं करते हैं। ऐसा करके हम हर समय एक डर के साये में जीने को मजबूर रहते हैं।

ईरान के आंतरिक मंत्री अब्दुल रजा रहमानी-फाजली ने कहा कि इस तरह की गश्ती के लिए आधिकारिक मंजूरी की जरूरत होती है। हम देखेंगे कि इस तरह की अनुमति ली गई है या नहीं।

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