मुंबई, 24 अक्टूबर (आईएएनएस)। देश की बुनियादी ढांचागत परियोजनाओं की राह में उच्च संचालन लागत, निर्माण और नीति संबंधी जोखिम बड़े रोड़े हैं, जिनके कारण परियोजनाएं अटकी पड़ी हैं। यह बात बुधवार को कोलियर्स इंटरनेशनल की एक रपट में कही गई है।
रपट के अनुसार, भारत के शहरी क्षेत्र की आबादी 2050 तक बढ़कर 101.6 करोड़ हो जाएगी और राजमार्ग, हवाई अड्डों, सड़कों, औद्योगिक गलियारों और स्मार्ट सिटी मिशन के लिए अतिरिक्त 402 अरब डॉलर की आवश्यकता होगी।
लेकिन, उच्च संचालन लागत, निर्माण व नीति संबंधी जोखिम, निजी भागीदारी के लिए प्रोत्साहन का अभाव, बुनियादी ढांचागत परियोजनाओं से लाभ में कमी जैसे मसले हैं जो इन परियोजनाओं के वित्तपोषण की राह में बाधक हैं।
कोलियर्स इंटरनेशनल इंडिया के प्रबंध निदेशक जो वर्गीज ने कहा, ” स्मार्ट सिटी मिशन, पीएमएवाई और बड़ी बुनियादी ढांचागत परियोजनाओं के विकास के कारण जीडीपी (सकल घरेलू उत्पाद) में रियल स्टेट का योगदान आने वाले वर्षो में बढ़कर दोहरे अंक में होने वाला है।”
उन्होंने कहा, “बड़ी बुनियादी परियोजनाओं का वित्तपोषण एक बड़ा कारक है जिससे उसका निष्पादन व समापन प्रभावित हो रहा है।”
dharmpath.com dharmpath