उप्र का मुख्यमंत्री तय करने में पूर्वाचल रहेगा किंग मेकर : लौटन राम

पूर्वाचल में 171 विधानसभा क्षेत्र आते हैं, जिनके चुनाव परिणाम में बदलाव लाने में निषाद, बिंद, केवट, राजभर, चौहान, कुशवाहा, मौर्य आदि अतिपिछड़ी जातियों की भूमिका महत्वपूर्ण होती है।

उन्होंने कहा, “2007 में मायावती को पूर्ण बहुमत की सरकार बनाने का अवसर पूर्वाचल ने ही दिया था जहां से बसपा को 102 सीटें मिली थीं और अतिपिछड़ों ने बसपा का साथ दिया था। बसपा के कुशासन से नाराज अतिपिछड़ों ने 2012 में सपा को 106 सीटें देकर सपा को पूर्ण बहुमत से जिताया। सपा, बसपा, भाजपा की सरकारों को बनाने में पूर्वाचल व इस क्षेत्र के अतिपिछड़ों की अहम भूमिका रहती है।”

निषाद ने एक बयान में कहा कि पूर्वाचल की 171 विधानसभा क्षेत्रों में से 85-90 विधानसभा क्षेत्रों में निषाद (मल्लाह, केवट, बिंद) निर्णायक है और कुर्मी भी 55-60 क्षेत्रों में निर्णायक है। चौहान, राजभर जहां 40-45 विधानसभा क्षेत्रों में निर्णायक स्थिति में हैं वहीं मौर्य/कुशवाहा-22-25 विधानसभा क्षेत्रों में निर्णायक हैं।

उन्होंने कहा, “विधानसभा चुनाव 2017 में भी अतिपिछड़ों की महत्वपूर्ण भूमिका रहेगी और जो दल लगभग सात प्रतिशत अतिपिछड़ों को अपने पाले में करने में सफल होगा, वहीं उत्तर प्रदेश में सबसे बड़े दल के रूप में उभर कर आएगा।”

विधानसभा चुनाव-2017 में निषाद (मल्लाह, केवट, बिंद), राजभर व चौहान ही राजनीतिक दलों के भाग्य का फैसला करेंगे।

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