बांदा, 15 नवंबर (आईएएनएस)। उत्तर प्रदेश में बांदा जिले की एक स्थानीय अदालत ने कमासिन थाने के तिलौसा गांव में दलित युवक की हुई हत्या के मामले में दो आरोपियों को जुर्म साबित होने पर उम्रकैद और जुर्माने की सजा सुनाई है।
वरिष्ठ अभियोजन अधिकारी राघवेंद्र प्रताप सिंह सेंगर ने मंगलवार को बताया कि कमासिन थाने के तिलौसा गांव का दलित युवक सिकदार 3 अप्रैल, 1993 की शाम अपने घर से कीर्तन सुनने गया था और फिर नहीं लौटा। एक हफ्ते बाद उसके पिता बंधना ने को थाने में गांव के ही गुलाब सिंह, उत्तम सिंह, रंजीत सिंह, बड़कू सिंह, चुकउआ सिंह, संतोष सिंह और करन सिंह के खिलाफ हत्या कर शव गायब करने की प्राथमिकी दर्ज कराई थी।
उन्होंने बताया कि पुलिस ने रंजीत की निशानदेही पर शव बरामद कर अदालत में आरोपपत्र दाखिल किया था।
सेंगर ने बताया कि दोनों पक्षों के अधिवक्ताओं की बहस सुनने के बाद सोमवार को अनुसूचित जाति-जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम की विशेष अदालत के न्यायाधीश डी.पी.एन. सिंह ने जुर्म साबित होने पर रंजीत सिंह और चुकउआ सिंह को उम्रकैद और 15-15 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई और साक्ष्य न मिलने पर बाकी आरोपियों को बरी कर दिया है।
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