सुरियावां के कडोर निवासी जोखन सिंह चौहान और उनके भाई का परिवार पंचायत की सत्ता पर काबिज होने का मंत्र बखूबी जानता है। खुद जोखन सिंह ने अपनी राजनीतिक करियर की शुरुआत जिला पंचायत सदस्य से की थी। उन्होंने राजनीति के धुरंधर रहे शिवकरन यादव को पराजित किया था। इसके बाद फिर शिवकरन यादव जिला पंचायत की राजनीति में उभर नहीं पाए।
जोखन सिंह जिला पंचायत में कई महत्वपूर्ण समितियों के अध्यक्ष भी थे। पिछली बार अपनी सत्ता बरकरार रखने के लिए जिला पंचायत वार्ड से मैदान में उतरे थे। लेकिन उन्हें पराजय का मुंह देखना पड़ा। उनके परिवार में उनका भतीजा हरिशंकर उर्फ दादा चौहान तीसरी बार जिला पंचायत वार्ड का चुनाव जीत चुके हैं। वह चौथी बार मैदान में कूदने की तैयारी में हैं। लेकिन इस बार जहां से वे चुनाव लड़ते हैं, वह वार्ड सामान्य श्रेणी में आ गया है।
दादा बहुजन समाज पार्टी से जुड़े हैं। उनकी पत्नी विंदा देवी भी जिला पंचायत सदस्य हैं। इसके अलावा जोखन सिंह चौहान यानी दादा और उनके भाइयों की तीन पत्नियां भी जिला पंचायत सदस्य हैं। ये हैं-बिंदु, रीता और स्नेहलता।
इस तरह देखा जाए तो पंचायत की राजनीति में पूरा परिवार ही सक्रिय है। महिला सशक्तीकरण भी इसी परिवार में देखने को मिल रहा है। यहां महिलाओं को राजनीति करने की पूरी छूट है। इस कुनबे में एक खूबी यह है कि जहां सीट सामान्य हो जाती है, वहां ये चुनाव नहीं लड़ते हैं।
सुरियावां और अभोली की पंचायत राजनीति में चौहान परिवार की अपनी अलग पहचान है। दादा की ओर से विधायकी की भी तैयारी की जा रही है। अब देखना है कि लखनऊ की दारुल सफा की कुर्सी उन्हें कब नसीब होगी।
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