लखनऊ, 19 नवंबर (आईएएनएस)। उत्तर प्रदेश की अखिलेश यादव सरकार ने शिक्षा मित्रों के मुद्दे पर गुरुवार को सर्वोच्च न्यायालय में विशेष अनुमति याचिका (एसएलपी) दायर की।
बेसिक शिक्षा विभाग की प्रमुख सचिव डिम्पल वर्मा एसएलपी दायर करने के लिए दिल्ली पहुंचीं। डिम्पल ने कहा, “याचिका दायर कर दी गई है। एसएलपी तैयार करने में सरकार ने कोई कसर नहीं छोड़ी है। 12 सितंबर को आए उच्च न्यायालय के फैसले के बाद से ही सरकार इसकी तैयारी कर रही थी।”
इस मसले को लेकर आला अधिकारी व मंत्री कई दिन दिल्ली में डेरा डाले रहे। कई चक्रों में सर्वोच्च अदालत के दिग्गज वकीलों व न्याय विभाग से इस बारे में सलाह ली गई। इसके बाद उच्च न्यायालय के फैसले के खिलाफ सरकार की ओर से सर्वोच्च न्यायालय में याचिका दायर की गई।
गौरतलब है कि 12 सितंबर को इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने सभी शिक्षामित्रों का समायोजन रद्द कर दिया था। इसमें से 1़30 लाख शिक्षामित्र समायोजित हो चुके हैं और बाकी को समायोजित करने की प्रक्रिया चल रही थी। उप्र सरकार ने इस मसले को केंद्र सरकार के साथ मिलकर सुलझाने की कोशिश भी की, लेकिन केंद्र ने भी राज्य के पाले में गेंद डाल दी है।
राज्य सरकार का तर्क है कि उप्र में शिक्षकों की कमी के चलते ही शिक्षामित्रों को रखा गया था। वहीं शिक्षा का अधिकार कानून के आने के बाद इन्हें राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (एनसीटीई) से अनुमति लेकर प्रशिक्षित भी किया गया।
एनसीटीई ने पहले से पढ़ा रहे शिक्षकों को अध्यापक पात्रता परीक्षा से मुक्त रखा है, लेकिन शिक्षामित्रों का समायोजन इसी आधार पर उच्च न्यायालय ने रद्द कर दिया है।
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