नई दिल्ली, 27 नवंबर (आईएएनएस)। भारत को ऊर्जा क्षेत्र में 2040 तक हर साल नौ लाख करोड़ रुपये से अधिक निवेश करना होगा, क्योंकि अगले 25 सालों तक विश्व स्तर पर ऊर्जा की मांग में होने वाली वृद्धि में भारत का सर्वाधिक योगदान रहेगा।
अंतर्राष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (आईईए) के कार्यकारी निदेशक फातिह बरॉल ने यहां शुक्रवार को भारत ऊर्जा परिदृश्य 2015 जारी करते हुए कहा, “भारत के ऊर्जा क्षेत्र में सुधार के लिए तीन चीज चाहिए : निवेश, निवेश और निवेश।”
उन्होंने कहा, “अगले 25 सालों में विश्वस्तर पर ऊर्जा की मांग में होने वाली वृद्धि में भारत का सर्वाधिक योगदान रहेगा। एशिया और विश्व स्तर पर भारत की महत्वपूर्ण स्थिति के बाद भी 2040 में देश में प्रति व्यक्ति ऊर्जा की मांग विश्व औसत से 40 फीसदी कम रहेगी।”
उन्होंने कहा, “ऊर्जा नियामकीय प्रणाली में सुधार और प्रोत्साहन को ठीक करने के लिए काफी कुछ किया जा रहा है। यह जरूरी है, क्योंकि देश को पहले की बनिस्बत अधिक निवेशकों और वित्त स्रोत जुटाने हैं।”
बरॉल ने कहा, “भारत को ऊर्जा आपूर्ति में सालाना सात लाख करोड़ रुपये और ऊर्जा क्षमता में सुधार में सालाना दो लाख करोड़ रुपये निवेश करने की जरूरत है।”
उन्होंने कहा कि अगले 25 सालों में देश में शहरी आबादी 31.5 करोड़ बढ़ जाने का अनुमान है, जिससे ऊर्जा की मांग में भारी वृद्धि होगी।
नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय ने गुरुवार को कहा था कि अक्टूबर तक सौर और पवन ऊर्जा जैसे नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों से ग्रिड से जुड़ी बिजली उत्पादन क्षमता में 2,311.88 मेगावाट वृद्धि हुई, जबकि सालाना लक्ष्य 4,460 मेगावाट है।
अक्टूबर अंत तक देश की ग्रिड से जुड़ी समस्त नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों से बिजली उत्पादन क्षमता 3,809.49 मेगावाट थी।
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