एकसमान है गुलाबी और लाल गेंद : गंभीर

नई दिल्ली, 9 सितम्बर (आईएएनएस)। दलीप ट्रॉफी के फाइनल में प्रवेश कर चुकी इंडिया ब्लू के कप्तान और शानदार फॉर्म में चल रहे सलामी बल्लेबाज गौतम गंभीर ने टूर्नामेंट में पहली बार इस्तेमाल हो रही गुलाबी गेंद के बारे में सभी शंकाओं के खारिज करते हुए कहा है कि गुलाबी गेंद लाल कुकाबुरा गेंद की तरह ही व्यवहार करती है।

फाइनल में गंभीर की कप्तानी वाली ब्लू का सामना युवराज सिंह की इंडिया रेड से होगा।

पहली बार दिन-रात के प्रारूप में खेली जा रही दलीप ट्रॉफी के दोनों लीग मैच खेलने वाले गंभीर ने गुरुवार को कहा कि बल्लेबाज को सिर्फ परिस्थितियों के हिसाब से छोटे-मोटे बदलाव करने पड़ते हैं।

वेबसाइट ईएसपीएनक्रिकइंफो ने गंभीर के हवाले से लिखा है, “हमें यह साफ-साफ समझ लेना चाहिए कि सिर्फ गेंद का रंग बदला है। यह वही सामान्य कुकाबुरा गेंद है और जो लाल या सफेद कुकाबुरा गेंद की तरह ही व्यवहार करती है।”

गंभीर ने कहा, “लोगों ने इसके बारे में कुछ ज्यादा ही बातें की थीं कि यह ज्यादा स्विंग करती है या कलाई से स्पिन गेंदबाजी करने वाले गेंदबाज की गेंद का पूर्वानुमान नहीं लगाया जा सकेगा, वगैरह-वगैरह। मेरा मानना है कि आप इसके बारे में जितना सोचेंगे उतना खेल को जटिल बना देंगे।”

उन्होंने कहा, “यह दिन में लाल गेंद से ज्यादा दिखती है क्योंकि इसका रंग चमकीला है। पिछले दो मैचों में जिनमें मैं खेला हूं, मैंने कुछ भी नया नहीं देखा। लाल और गुलाबी गेंद एक समान हैं।”

सलामी बल्लेबाज ने कहा, “मैं परंपरावादी हूं। मेरा मानना है कि इसे दिन में खेला जाना चाहिए, यह मेरा व्यक्तिगत विचार है। आप 50 ओवर को टी-20 में बदल सकते हैं लेकिन टेस्ट क्रिकेट को पहले की तरह ही खेला जाना चाहिए, वरना इसका आकर्षण खत्म हो जाएगा।”

घरेलू क्रिकेट में बेहतरीन लय में चल रहे गंभीर ने पिछली तीन पारियों में क्रमश: 77, 90, 59 रन बनाए। अपने प्रदर्शन पर उन्होंने कहा कि वह अपनी मौजूदा फॉर्म को जारी रखना चाहते हैं और आगे अपनी पारी को बड़े स्कोर में बदलने की कोशिश करेंगे।

उन्होंने कहा, “मैं काफी खुश हूं। आप सत्र की शुरुआत में थोड़े घबराए हुए होते हैं क्योंकि आप अच्छी शुरुआत करना चाहते हैं।”

गंभीर ने कहा, “लगातार तीन अर्धशतक अच्छी बात है। मुझे उम्मीद है कि मैं इस प्रदर्शन को जारी रख सकूंगा। लेकिन मैं इन अर्धशतकों को शतक में बदलने की कोशिश करूंगा। मेरे पास अभी भी दो पारियां हैं।”

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