अहमदाबाद, 10 अक्टूबर (आईएएनएस)। अल जजीरा टीवी चैनल ने बीते दिनों एक खास कार्यक्रम पेश किया था, जिसमें दिखाया गया है कि किस तरह एक महिला की बदौलत कबड्डी ने अफ्रीकी देश केन्या में मजबूती से अपने पैर जमा लिए हैं। यह महिला और कोई नहीं बल्कि केन्या की राष्ट्रीय रग्बी टीम की सदस्य और केन्या कबड्डी महासंघ की प्रमुख एटिएनो ओ लेवेंटर हैं।
अहमदाबाद, 10 अक्टूबर (आईएएनएस)। अल जजीरा टीवी चैनल ने बीते दिनों एक खास कार्यक्रम पेश किया था, जिसमें दिखाया गया है कि किस तरह एक महिला की बदौलत कबड्डी ने अफ्रीकी देश केन्या में मजबूती से अपने पैर जमा लिए हैं। यह महिला और कोई नहीं बल्कि केन्या की राष्ट्रीय रग्बी टीम की सदस्य और केन्या कबड्डी महासंघ की प्रमुख एटिएनो ओ लेवेंटर हैं।
केन्या के पश्चिमी हिस्से से ताल्लुक रखने वाली लेवेंटर उसी लियू जनजाति से संबंध रखती हैं, जिस जनजाति के अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा के पिता ताल्लुक रखते थे। यह इस महिला के जुनून और मेहनत का ही नतीजा है कि दो साल के भीतर केन्याई खिलाड़ी प्रो कबड्डी में भी खेल रहे हैं और कबड्डी विश्व कप में हिस्सा लेने पहुंचे हैं। और तो और उन्होंने विश्व कप की शुरुआत जीत के साथ की है।
आगामी 21 अक्टूबर को अपना 32वां जन्मदिन मनाने जा रहीं लेवेंटर एक अंतर्राष्ट्रीय एथलीट हैं और केन्या के लिए रग्बी खेलती हैं। साथ ही वह केन्या कबड्डी महासंघ की अध्यक्ष भी हैं। रग्बी अगर उनकी पहली पसंद है तो कबड्डी से वह जुनूनी स्तर तक प्यार करती हैं। इस महिला ने कबड्डी को शून्य से शिखर तक पहुंचाने का काम किया है। लेवेंटर की दो साल की बेटी सलमा है, जो उनके साथ भारत आई हुई है।
आईएएनएस को दिए साक्षात्कार में लेवेंटर ने कहा कि उनके लिए यह सफर आसान नहीं रहा है। लेवेंटर ने कहा, “मेरे लिए यह सफर आसान नहीं रहा। मैंने बिना किसी प्रायोजक के टीम खड़ी की, लेकिन अब मैं खुश हूं कि विश्व कप में पहली जीत के बाद कई सारे प्रायोजकों ने हमसे जुड़ने की इच्छा जाहिर की है।”
बकौल लेवेंटर, “मैंने केन्या में कबड्डी को न सिर्फ खड़ा किया बल्कि उसे पहचान भी दिलाई और आज मेरे पास जश्न मनाने के कई कारण हैं। हम हर जगह देखे जाते हैं। हमारी एक पहचान है और हम प्रो कबड्डी और विश्व कप जैसे आयोजनों में खेल रहे हैं।”
केन्या सरकार क्या कबड्डी को समर्थन और मदद पहुंचाती है? इस पर लेवेंटर ने कहा, “अंतर्राष्ट्रीय कबड्डी महासंघ (आईकेएफ) ने इस सफर में हमारा हर वक्त साथ दिया है लेकिन केन्या सरकार ने हमें अब तक वित्तीय मदद नहीं पहुंचाई है। हालांकि, मुझे लगता है कि आने वाले दिनों में हमें केन्या सरकार से मदद मिलेगी। हमारी सरकार यूं ही किसी खेल संघ को मदद नहीं करती। वह देखती है कि हम परिणाम क्या दे रहे हैं।”
लेवेंटर बोलीं, “मैंने कई बार सरकार से कहा कि हमें मदद चाहिए, लेकिन सरकार ने कहा कि अभी जो पैसा है वह ओलम्पिक की तैयारी में जा रहा है लिहाजा वह अभी उनकी मदद नहीं कर सकते, लेकिन भविष्य में वह प्रायोजकों को लुभाने में उनकी जरूर मदद करेंगे। सरकार ने हमें हालांकि प्रशिक्षण के लिए सुविधा मुहैया कराई है। सरकार ने हमें अफ्रीका के सबसे अच्छे स्टेडियमों में अभ्यास की इजाजत दी है। हमें हालांकि मैट की सुविधा नहीं है, लेकिन सरकार ने फिलहाल जो मदद पहुंचाई है, वह काफी है।”
लवेंटर के पिता पेशे से डॉक्टर हैं और केन्या के लिए अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर फुटबाल खेल चुके हैं। उनकी दिवंगत मां भी केन्या के लिए फुटबॉल और नेटबॉल खेल चकी हैं। उनके भाई टिलेन ओगुटा ने केन्या के लिए अंतर्राष्ट्रीय फुटबाल खेला है और अब कोचिंग का काम करते हैं। लेवेंटर कहती हैं, “मुझे गर्व है कि मेरा पूरा परिवार खेलों से जुड़ा रहा है।”
केन्या कबड्डी महासंध की अध्यक्ष होने के बाद भी लेवेंटर खुद ही टीम को कोचिंग देती हैं। लेवेंटर ने कहा, “मैं ही केन्याई टीम को प्रशिक्षण देती हूं। मैं एक एथलीट हूं और प्रशिक्षण की आधारभूत चीजों का अनुभव भी लिया है। मैं खेल की बारीकियों को समझती हूं। जहां तक कबड्डी की बात है तो मुझे सिर्फ इसके नए नियमों को जानने की जरूरत है और उनके आधार पर मैं अपने खिलाड़ियों को प्रशिक्षित कर लेती हूं। मैं जानती हूं कि खिलाड़ियों को क्या देना है? यह जरूरी नहीं कि कबड्डी खेलने वाला ही अच्छा कोच साबित होगा। जोस मोरिन्हो ने कभी फुटबॉल नहीं खेला है लेकिन आज वह फुटबाल के सबसे अच्छे कोच हैं।”
पेशे से डिजाइनर लेवेंटर कहती हैं की उनकी टीम विविधताओं से भरी है। उनकी टीम में कोई सुरक्षा गार्ड का काम करता है तो कोई डांसर है। बकौल लेवेंटर, “मेरी टीम में कई खेलों और पेशों के खिलाड़ी हैं। हमारे देश में खिलाड़ियों की कोई कमी नहीं। कप्तान डेविड सिलिसा मोसाम्बाई एक सीक्योरिटी गार्ड थे। फेलिक्स ओधियांबो ओपाना एक डांसर थे और एक्टिंग भी करते हैं। आज ये सभी कबड्डी के कारण स्टार हैं।”
लेवेंटर कहती हैं कि उनकी टीम खुद ही अपना अनुशासन तय करती है, उन्हें इसके लिए मेहनत करने की जरूरत नहीं होती। बकौल लेवेंटर, “मेरी टीम अनुशासित है। वह अपना अनुशासन खुद ही तय करती है। उन्होंने मुझसे कह रखा है कि मैडम जो लेट होगा उसे प्रशिक्षण सत्र से बाहर बैठना होगा। इसका पालन सभी खिलाड़ी करते हैं। यह नियम मैने नहीं बनाया है। मैं अपनी टीम में बिना मतलब की दखलअंदाजी नहीं करती। मैं तो आमतौर पर कोचिंग के लिए भी नहीं जाती। फेलिक्स कोचिंग का काम करता है। वह एक अच्छा कोच है। मैं टीम की मदद तभी करती हूं जब उसे खास कंडीशनिंग की जरूरत हो या फिर खिलाड़ियों को प्रेरित करने की जरूरत हो।”
केन्या में कबड्डी का भविष्य उज्जवल है, इस पर लेवेंटर ने कहा, “मेरा लक्ष्य केन्या में कबड्डी को स्कूलों तक पहुंचाना है। मैं चाहती हूं कि प्रो कबड्डी या विश्व कप में खेल चुके हमारे खिलाड़ी मसलन फेलिक्स और डेविड स्कूलों में जाएं और बच्चों को कबड्डी के लिए जागरूक और प्रोत्साहित करें। प्रो कबड्डी में खेलने के कारण लोग उन्हें पहचाने लगे हैं। मैं मानती हूं कि मेरे देश में इस खेल का भविष्य काफी उज्ज्वल है।”
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