अंकारा, 19 जुलाई (आईएएनएस)। तुर्की के राष्ट्रपति रेसेप तईप एदरेगान ने मंगलवार को कहा कि अगर लोग मांग करेंगे तो वह फांसी की सजा बहाल करने को तैयार हैं।
गत 15 जुलाई को तुर्की में सैन्य तख्तापलट की कोशिश के बाद राष्ट्रपति ने यह घोषणा की।
बीबीसी के अनुसार, उन्होंने इस्तांबुल में अपने निवास के बाहर समर्थकों को संबोधित करते हुए यह टिप्पणी की। लोग फांसी की सजा बहाल करने की मांग कर रहे थे।
राष्ट्रपति ने कहा कि तुर्की एक लोकतांत्रिक देश है और यहां कानून का शासन है।
बीबीसी के अनुसार एदरेगान ने कहा कि अगर लोग इसकी मांग करते है और संसद कानून पर मुहर लगा देती है तो वह मृत्यु दंड बहाल करने को तैयार हैं। उन्होंने कहा, “लोगों की मांग को किनारे नहीं लगाया जा सकता है।”
राष्ट्रपति ने कहा, “आज क्या अमेरिका में मृत्य दंड नहीं है? क्या रूस में नहीं है? क्या चीन में नहीं है? क्या दुनिया भर के देशों में नहीं है? केवल यूरोपीय संघ के देशों में मृत्यु दंड नहीं है।”
यूरोपीय संघ का एक सदस्य बनने के लिए तुर्की ने साल 2004 में मृत्यु दंड का प्रावधान खत्म कर दिया था।
तख्तालट की कोशिश विफल करने के क्रम में हुए संघर्ष में कम से कम 232 लोग मारे गए थे और 1400 लोग घायल हुए।
विद्रोही सैनिकों ने इस्तांबुल शहर में कमाल अतातुर्क हवाई अड्डे के आसपास पुलों को बंद कर दिया था और अंकारा में राष्ट्रपति निवास के बाहर टैंक तैनात कर दिए थे। बाद में कई विद्रोही सैनिकों ने आत्मसमर्पण कर दिया था।
बीबीसी के अनुसार अधिकारियों ने अशांति और तख्ता पलट के लिए समानान्तर व्यवस्था खड़ा करने के लिए अमेरिका में रहने वाले मुस्लिम धर्मगुरु मौलवी फेतुल्ला गुलेन को दोषी ठहराया है।
तख्तापलट की कोशिश के बाद तुर्की के गृह मंत्रालय ने करीब 9 हजार पुलिस अधिकारियों को तख्तापलट की कोशिश में शामिल होने के संदेह में सोमवार को बर्खास्त कर दिया।
6 हजार सैन्य कर्मियों को गिरफ्तार किया गया है और सप्ताह के अंत में करीब एक हजार न्यायाधीशों को निलंबित कर दिया गया।
dharmpath.com dharmpath