काठमांडू, 2 मई (आईएएनएस)। नेपाल में आए विनाशकारी भूकंप के बाद काठमांडू में अधिकारी घरों की जांच कर रहे हैं और उन्हें लाल, पीले और हरे रंगों से चिन्हित कर रहे हैं।
लाल रंग का मतलब घर बुरी तरह से क्षतिग्रस्त है और मकानमालिक इसके अंदर नहीं रह सकता, जबकि हरे रंग के निशान का मतलब है कि आप अब अपने घर में जा सकते हैं।
नेपाल में 25 अप्रैल को आए भूकंप में काठमांडू के 10 लाख से अधिक लोगों सहित तमाम लोग बेघर हुए हैं।
आर्किटेक्टों के साथ मिलकर अधिकारियों ने घरों की जांच शुरू कर दी है।
नेपाल में आए 7.9 तीव्रता वाले भूकंप में 6,000 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है और 10,000 से ज्यादा घायल हुए हैं। भूकंप में लाखों लोग विस्थापित हुए हैं।
अब अधिकारी लाल, पीले और हरे रंग के निशान से घरों को चिन्हित कर रहे हैं।
लाल रंग से चिन्हित घर का मतलब है कि यह रहने के लिए असुरक्षित है और इसे गिराया जाएगा। पीले रंग से चिन्हित घर में रहने से पहले मरम्मत की जरूरत है, जबकि हरे रंग से चिन्हित घर रहने के लिए सुरक्षित हैं।
काठमांडू के ज्ञानेश्वर के पास मध्यवर्गीय इलाके के 58 वर्षीय धीरज पांडे के घर पर लाल रंग का निशान लगाया गया है।
धीरज ने आईएएनएस संवाददाता को बताया, “मुझे नहीं पता कि क्या करना है। हमें बताया गया है कि घर के अंदर रहना जोखिमभरा है।”
भूकंप के बाद उनके 11 कमरों वाले घर में बहुत-सी दरारें पड़ गई हैं। धीरज का परिवार- पत्नी, दो बच्चे, माता-पिता भूकंप से सुरिक्षत हैं।
भूकंप के बाद से धीरज का पूरा परिवार शामियाने में रह रहा है। उन्होंने अपनी कार की ओर इशारा करते हुए कहा, “अब यह मेरा शयनकक्ष है।”
धीरज की पत्नी सुनीता ने बताया, “भूकंप के समय हमारा घर पीछे की ओर जा रहा था। यहां तक कि जब हम बाहर की ओर आ रहे थे, तब भी लग रहा था कि धरती घूम रही है।”
धीरज की मां व्हीलचेयर पर हैं। उनके 89 वर्षीय पिता भी भूकंप के बाद से मुश्किलों का सामना कर रहे हैं।
उन्हें नहीं पता कि वह अब दोबारा अपना आशियाना कब बना पाएंगे।
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