भोपाल, 10 जनवरी (आईएएनएस)। कृषि वैज्ञानिक देवेंद्र शर्मा ने यहां रविवार को कहा कि देश के अर्थशास्त्री औद्योगिक विकास को देश की प्रगति का जरिया बताते हैं, मगर वास्तव में यह किसानों को दिहाड़ी मजदूर बनाने की कोशिश का हिस्सा है। सरकार उद्योगों को खुले दिल से मदद दे रही है, मगर किसानों को उनका वाजिब हक भी नहीं मिल रहा है।
भोपाल, 10 जनवरी (आईएएनएस)। कृषि वैज्ञानिक देवेंद्र शर्मा ने यहां रविवार को कहा कि देश के अर्थशास्त्री औद्योगिक विकास को देश की प्रगति का जरिया बताते हैं, मगर वास्तव में यह किसानों को दिहाड़ी मजदूर बनाने की कोशिश का हिस्सा है। सरकार उद्योगों को खुले दिल से मदद दे रही है, मगर किसानों को उनका वाजिब हक भी नहीं मिल रहा है।
मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के समन्वय भवन में आयोजित कृषि स्नातक संघ के पहले राष्ट्रीय अधिवेशन में शर्मा ने अपनी यह बेबाक राय रखी। उन्होंने कहा कि उद्योगों को सरकार सालाना 42 लाख करोड़ रुपये की मदद देती है, मगर किसानों को समर्थन मूल्य भी आसानी से नहीं मिलता। औद्योगिक विकास को देश की प्रगति का हिस्सा बताने के साथ रोजगार का जरिया बताया जाता है, मगर वाकई में रोजगार का जरिया खेती है।
शर्मा ने कहा कि सरकारी कर्मचारियों को तब तक सातवां वेतनमान नहीं मिलना चाहिए, जब तक किसानों को लागत का सही दाम नहीं मिल जाता। कर्मचारियों का तो सौगुना वेतन बढ़ चुका है, मगर किसान की फसल का दाम महज 16 गुना ही बढ़ा है।
इस मौके पर किसान-कल्याण एवं कृषि विकास मंत्री गौरीशंकर बिसेन ने कृषि अधिकारियों से कृषि उत्पादन बढ़ाने में योगदान देने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि वर्ष 2025 में अनुमानित खाद्यान्न उत्पादन का लक्ष्य पूरा हो, इस दिशा में आज से ही प्रयास करना जरूरी है।
मंत्री बिसेन ने कहा, “खेती हमारे राष्ट्र के विकास की धुरी है। इसके लिए जरूरी है कि हम नई तकनीक के साथ किसानों को आय के वैकल्पिक स्रोत उपलब्ध करवाएं।”
अधिवेशन की अध्यक्षता नगरीय विकास एवं पर्यावरण विभाग के उप सचिव ओ़ पी़ श्रीवास्तव ने की। इसमें नेहरू युवा केंद्र के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष वी.डी. शर्मा, विधायक लाखन सिंह यादव, संघ के अध्यक्ष अजय कौशल, किसान-कल्याण एवं कृषि विकास के संचालक मोहन लाल मीणा, जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय के निदेशक पी़ क़े बिसेन ने भी अपने विचार रखे।
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