ब्रिटेन के समाचार पत्र ‘द गार्जियन’ ने सोमवार को खुलासा किया है कि लंदन केकैंसर शोध और जागरूकता संस्था, कैंसर रिसर्च यूके (सीआरयूके) के शिक्षाविदों और शोधकर्ताओं ने अपनी सेवानिवृत्ति निधि को ब्रिटिश अमेरिकन टोबैको कंपनी (बैट) में निवेश कर रखा है।
विश्वविद्यालयों के व्याख्याताओं और कर्मचारियों का लेखा-जोखा देखने वाली युनिवर्सिटीज सुपरएन्योएशन स्कीम (यूएसएस) की नवीनतम वार्षिक रपट से पता चला है कि मार्च 2015 में बैट कंपनी में लगभग 31 करोड़ डॉलर का निवेश किया गया है।
धूम्रपान के खिलाफ लड़ाई में इस्तेमाल होने वाला पैसा तंबाकू उद्योग में निवेशित हो रहा है, यह वाकई एक बड़ा झटका है।
सीआरयूके से जुड़े कुछ वैज्ञानिकों का कहना है कि उन्हें इस तरह की संस्थाओं में निवेश करने के लिए बाध्य किया गया है।
एक गुप्त शोधार्थी ने अखबार से कहा, “सीआरयूके का धन का तंबाकू उद्योग के विकास और सहयोग में इस्तेमाल किया जा रहा है।”
अमेरिका के निवेशकों के इस निर्णय का विभिन्न प्राध्यापकों और कुलपतियों का प्रतिनिधित्व करने वाली युनिवर्सिटीज यूके के एक प्रवक्ता ने अमेरिकी निवेशकों की पसंद का बचाव किया है।
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