उन्होंने यह भी कहा कि आस्ट्रेलिया को मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) और चीनी निवेश के जरिये चीन के आर्थिक संबंध से लाभ मिलता रहेगा।
चीनी अर्थव्यवस्था के विशेषज्ञ आस्ट्रेलियाई अर्थशास्त्री लॉरेनसेसन ने वैश्विक अर्थव्यवस्था में सुधार की धीमी व असंतुलित रफ्तार का कारण देशों में संरचनात्मक सुधार की इच्छाशक्ति की कमी को बताया।
उन्होंने कहा, “हमने कई देशों को मांग बढ़ाने के लिए मौद्रिक एवं वित्तीय नीति जैसे मैक्रोइकोनॉमिक साधनों का इस्तेमाल करते देखा, लेकिन उत्पादकता बढ़ाने वाले सुधारों पर प्रगति काफी कम रही।”
लॉरेनसेसन ने कहा कि इसमें कोई संदेह नहीं है कि सुस्त वैश्विक अर्थव्यवस्था से चीन की अर्थव्यवस्था पर भी असर पड़ा है। हाल के आंकड़ों से पता चलता है कि चीनी निर्यात में सालाना आधार पर गिरावट आई है।
उन्होंने कहा, “आंकड़ों से पता चलता है कि वैश्विक आयात की तुलना में चीन के निर्यात में गिरावट की गति धीमी है। दूसरे शब्दों में कहें तो विदेशी बाजारों में चीन अब भी लाभ की स्थिति में है।”
बकौल लॉरेनसेसन, “सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि चीन की विकास दर वर्ष 2010 से घरेलू मांग की वजह से बढ़ी है। मुझे नहीं लगता कि सुस्त वैश्विक अर्थव्यवस्था के बावजूद चीन की विकास दर तेजी से घटेगी।”
dharmpath.com dharmpath