चीन के साथ बातचीत को तिब्बत तैयार : सांगय

धर्मशाला, 10 मार्च (आईएएनएस)। तिब्बती धर्मगुरु दलाई लामा के दूत चीन के अपने समकक्षों के साथ वार्ता करने के लिए तैयार हैं। निर्वासित तिब्बती सरकार के प्रधानमंत्री लोबसांग सांगय ने यहां मंगलवार को यह जानकारी दी।

तिब्बत के 56वें राष्ट्रीय विद्रोह दिवस की वर्षगांठ पर सांगय ने कहा, “दलाई लामा के दूत अपने चीनी समकक्षों के साथ किसी भी समय और स्थान पर बातचीत के लिए तैयार हैं।”

इस दौरान सांगय ने ‘मध्य मार्गी दृष्टिकोण’ अपनाने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। उन्होंने इस मध्य मार्गी दृष्टिकोण के तहत चीन से तिब्बत को अलग नहीं करने की मांग करते हुए तिब्बत के लोगों के लिए वास्तविक स्वायत्तता की मांग की है। उन्होंने कहा, “तिब्बत के लोगों के लिए वास्तविक स्वायत्तता निर्धारित करने की दिशा में मंत्रिमंडल की सलाहकार समिति ‘कार्य बल’ ने जनवरी के प्रथम सप्ताह में एक सम्मेलन आयोजित किया था।”

इस सम्मेलन में तिब्बत में राजनीतिक विकास, चीनी नेतृत्व के साथ भावी वार्ताओं और व्यापक अंतर्राष्ट्रीय राजनीतिक परिदृश्य में विकास जैसे गहन मुद्दों पर चर्चा की गई।

सांगय ने अपने बयान में कहा, “तिब्बती नेतृत्व का यह सशक्त विश्वास है कि दलाई लामा के दूतों और चीनी नेतृत्व के प्रतिनिधियों के बीच सिर्फ बातचीत से ही इस समस्या का समाधान निकाला जा सकता है।”

तिब्बती संसद के अध्यक्ष पेनपा सेरिंग ने एक अलग बयान में कहा, “मध्य मार्गी दृष्टिकोण के जरिए समस्या के समाधान की हमारी नीति में कोई बदलाव नहीं हुआ है। तिब्बत में मौजूदा हालात और तिब्बत के महत्वपूर्ण मुद्दों को सुलझाने के हमारे प्रयासों से चीन और तिब्बत दोनों को ही लाभ होगा।”

आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक, चीन और दलाई लामा के दूतों ने तिब्बती मुद्दों को सुलझाने के लिए 2002 से लेकर अब तक नौ दौर की वार्ताएं की हैं।

दोनों पक्षों के बीच आखिरी दौर की बातचीत जनवरी 2010 में बीजिंग में हुई थी और तब से दोनों पक्षों के बीच गतिरोध बना हुआ है।

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