बीजिंग, 28 जुलाई (आईएएनएस)। चीन में 2015 में स्थापित पहले भारतीय योग विद्यालय में रह रहे और वहां कला पढ़ा रहे भारतीय योग प्रशिक्षकों ने दोनों देशों में कई समानताएं पाई हैं।
समाचार एजेंसी सिन्हुआ के अनुसार, कुनमिंग शहर में युनान नेशनेलिटीज यूनिवर्सिटी में एक भारतीय योग प्रशिक्षक यतींद्र अमोली भारतीय और चीन की संस्कृति में कई समानताएं पाते हैं।
वह दोनों देश के लोगों के बीच अल्पसंख्यक संस्कृति, जीवनशैली, खाने पीने की आदतें और यहां तक की शादी संबंधी रीति रिवाज में समानताएं पाते हैं।
उन्होंने कहा, “चीन के लोग प्राचीन काल में प्राचीन टी हॉर्स रोड (दक्षिण-पश्चिम चीन में एक व्यापार संपर्क मार्ग, जो दक्षिण एशिया तक फैला था) के माध्यम से भारत में चाय जैसे कई तरह के समानों का निर्यात करते थे। व्यापार का इतिहास हमारे बीच कुछ समानताओं को परिभाषित कर सकता है।”
युन्नान नेशनेलिटीज यूनिवर्सिटी ने एक दूसरे से दोनों देशों की कलाओं को सीखने संबंधी प्रचार में मदद के लिए एक टाय ची कॉलेज को भी स्थापित किया है। टाय ची शारीरिक व्यायाम संबंधी चीन की एक प्राचीन धरोहर है, जिसकी योग से तुलना की जाती है।
अमोली ने कहा, “टाय ची एक ध्यान की सर्वश्रेष्ठ विधि है और प्राणायाम करने में हमारी काफी मदद कर सकता है। टाय ची के अभ्यास के माध्यम से हम विश्व की ऊर्जा को महसूस कर सकते हैं।”
कॉलेज में अपने छात्रों को योग का प्रशिक्षण दे रहीं एक अन्य 37 वर्षीय भारतीय योग प्रशिक्षक सुब्बुलक्ष्मी वैलुसामी के हवाले से समाचार एजेंसी सिन्हुआ ने बताया, “प्राकृतिक अवस्था में अपनी पीठ के साथ अपने सीने के सामने दोनों हथेलियों को साथ रखो।”
इन गतिविधियों को दिखाने के बाद, वह अपने अनुयायियों को देखती हैं और उनको इसे ठीक से करना बताती हैं।
वर्ष 2015 से यानी लगभग ढेड़ वर्ष से चीन में रहने वाली वैलुसामी ने खुद को कुनमिंग की जलवायु और जीवनशैली को ग्रहण कर लिया है और अपना खुद का एक सामाजिक दायरा बनाया है।
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