न्यूयॉर्क, 4 नवंबर (आईएएनएस)। मैसाचुसेट्स प्रौद्योगिकी संस्थान (एमआईटी) के शोधकर्ताओं ने ड्रोन की एक टुकड़ी के लिए स्वायत्त प्रणाली विकसित की है, जो बिना जीपीएस की मदद के घने जंगलों में भटके पैदल यात्रियों की तलाश सकती है।
यह प्रणाली ड्रोन को घने जंगलों के भीतर केवल वायरलेस संचार और ड्रोन में मौजूद गणना प्रणाली का प्रयोग कर भू-भाग में खोज करने की इजाजत देती है।
एमआईटी के वैमानिकी व खगोलविज्ञान विभाग के मुख्य लेखक युलुन टियान ने कहा, “दरअसल हम इंसानों की जगह ड्रोन की टुकड़ी का प्रयोग कर रहे हैं ताकि खोज व बचाव प्रक्रिया के खोज हिस्से को अधिक प्रभावशाली बना सकें।”
क्वाडरोटोर ड्रोन स्थान का आकलन, स्थानीयकरण और मार्ग योजना तैयार करने के लिए लेजर रेंज फाइंडर से लैस है। जब ड्रोन इसके इर्द-गिर्द उड़ेगा, तो वह भू-भाग का एक व्यक्तिगत 3डी मैप तैयार करेगा।
टीम ने अपने आप बने जंगलों में कई ड्रोनों का प्रयोग किया। साथ ही अमेरिका के वर्जीनिया स्थित नासा के लैंगली शोध केंद्र के भीतर जंगली इलाके में भी दो ड्रोन का परीक्षण किया गया।
दोनों परीक्षण में प्रत्येक ड्रोन ने करीब दो से पांच मिनट के भीतर 20 वर्ग मीटर इलाके का खाका तैयार किया और वास्तविक समय में उनके नक्शे बना दिए।
टियान ने कहा, “एक 3डी मैप तैयार करना अधिक विश्वसनीय है बजाए ड्रोन के साथ कैमरा जोड़कर और वीडियो फीड की निगरानी करने के।”
यह नतीजे पांच से आठ नवंबर तक अर्जेनटीना के ब्यूनस आयर्स में आयोजित इंटरनेशनल सिम्पोजियम ऑन एक्सपेरिमेंटल रोबोटिक्स कांफ्रेंस में प्रस्तुत किए जाएंगे।
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