इस्लामाबाद, 15 जून (आईएएनएस)। पाकिस्तान के राजनीतिक संगठन, जमात-ए-इस्लामी (जेआई) ने रोहिंग्या मुसलमानों के प्रति हमदर्दी जताते हुए उनकी दुर्दशा पर अफसोस जताया है और मांग की है कि मुस्लिम देश विरोध स्वरूप म्यांमार के साथ अपने कूटनीतिक संबंध तोड़ लें।
‘डॉन ऑनलाइन’ द्वारा सोमवार को जारी रपट के मुताबिक, जमात प्रमुख सिराजुल हक ने रविवार को इस्लामाबाद में एक रैली को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नवाज शरीफ से आग्रह किया कि दुनिया भर के मुसलमानों, खास तौर से रोहिंग्या मुसलमानों, की सुरक्षा के लिए एक सामान्य रणनीति बनाने हेतु एक इस्लामी सम्मेलन बुलाया जाए।
उन्होंने कहा कि म्यांमार के मुसलमान ऐतिहासिक रूप से क्रूरता और निर्दयता की पीड़ा झेल रहे हैं, लेकिन तथाकथित सभ्य समाज और मानवाधिकार संगठन मूकदर्शक बने हुए हैं।
उन्होंने कहा, “वे लोग जो पशु अधिकारों पर शोर-शराबा करते हैं, उन्होंने रोहिंग्या युवाओं पर हो रही निर्दयता और महिलाओं के उत्पीड़न की सुलगती सच्चाई की तरफ आंखें बद कर रखी है।”
हजारों महिलाओं और बच्चों की जानवरों की तरह हत्या कर दी गई, लेकिन किसी ने विरोध नहीं किया।
उन्होंने कहा कि इस तरह की निर्दयता को देखकर चुप रहना अन्याय है और यही सही समय है कि जब पाकिस्तान सरकार को आगे कदम बढ़ाना चाहिए।
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