द हेग, 15 मई (आईएएनएस)। भारत ने पाकिस्तान में भारतीय नौसेना के पूर्व अधिकारी कुलभूषण जाधव को जासूसी के आरोप में सुनाए गए मृत्युदंड को तत्काल निलंबित करने की मांग करते हुए सोमवार को अंतर्राष्ट्रीय अदालत (आईसीजे) के समक्ष आशंका जताई कि इस मामले में उसका फैसला आने से पहले ही सजा पर अमल किया जा सकता है।
भारतीय अधिकारी दीपक मित्तल ने बहस की शुरुआत करते हुए अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय से कहा, “जाधव को न तो अपने कानूनी अधिकारों का इस्तेमाल करने का मौका दिया गया और न ही उन्हें राजनयिक संपर्क मुहैया कराया गया। आशंका है कि इस मामले में आईसीजे का फैसला आने से पहले ही उनकी मौत की सजा पर अमल किया जा सकता है।”
मित्तल ने कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे आईसीजे के अध्यक्ष रॉनी अब्राहम के समक्ष कहा कि भारत ने पाकिस्तान से जाधव तक राजनयिक संपर्क प्रदान करने के लिए कई बार आग्रह किया, लेकिन इस्लामाबाद ने हर बार इनकार किया।
मित्तल ने अदालत से कहा, “भारत को प्रेस रिपोर्ट से जानकारी मिली कि जाधव को मौत की सजा एक कथित कबूलनामे के आधार पर दी गई है। भारत के कई बार आग्रह करने के बावजूद पाकिस्तान ने मामले का आरोप-पत्र तथा मामले से संबंधित किसी भी प्रकार के दस्तावेज मुहैया नहीं कराए।”
उन्होंने कहा, “यह स्पष्ट है कि जाधव को उनके कानूनी अधिकार से वंचित किया गया। जाधव के माता-पिता ने पाकिस्तान जाने के लिए वीजा आवेदन दिया, लेकिन उस पर कोई सुनवाई नहीं हुई।”
विदेश मंत्रालय में संयुक्त सचिव तथा सह-एजेंट वी.डी.शर्मा ने कहा कि मार्च 2016 में जाधव की गिरफ्तारी के बाद उसे राजनयिक संपर्क प्रदान करने से इनकार करके पाकिस्तान अपने सभी कानूनी उत्तरदायित्वों का पालन करने में नाकाम रहा।
भारत मौत की सजा को तत्काल निलंबित करने के रूप में राहत की मांग कर रहा है। पाकिस्तान ने जाधव पर जासूसी करने तथा पाकिस्तान में विध्वंसक गतिविधियों में संलिप्तता का आरोप लगाया है, जबकि भारत ने आरोपों से इनकार किया है।
शर्मा ने अदालत से यह भी मांग की है कि वह सैन्य अदालत द्वारा जाधव को दी गई मौत की सजा पर अमल करने से पाकिस्तान को रोके तथा उसके फैसले को अवैध करार देने का निर्देश दे।
स्थानीय समयानुसार सोमवार सुबह शुरू हुई दिनभर चलने वाली सुनवाई के तहत डेढ़ घंटे के दो सत्र होंगे, जिनमें भारत तथा पाकिस्तान को अपना पक्ष रखने का मौका दिया जाएगा।
पाकिस्तान अपना पक्ष दोपहर बाद दूसरे सत्र में रखेगा।
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