स्वास्थ्य, श्रम व कल्याण मंत्रालय द्वारा किए गए सर्वेक्षण के अनुसार, देश में करीब 200 बाल परामर्श केंद्रों ने वित्तवर्ष 31 मार्च की समाप्ति के दौरान 1,03,260 बाल उत्पीड़न मामलों को निपटाया। यह संख्या पिछले साल की तुलना में 16 प्रतिशत बढ़ी।
मनोवैज्ञानिक शोषण जैसे कि बच्चों के सामने माता-पिता के बीच हिंसा के 48,693 मामलों व कुल 47.2 प्रतिशत रहे। बढ़ती आय असमानता और स्थानीय समुदायों के परिवारों का अलगाव दंपति के बीच की हिंसा को बढ़ाने के लिए जिम्मेदार रहे।
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