इस्लामाबाद/काबुल, 22 मई (आईएएनएस)। तालिबान सरगना मुल्ला अख्तर मुहम्मद मंसूर की अमेरिकी ड्रोन हमले में पाकिस्तान मे मौत हो गई। अफगान एवं पाकिस्तानी अधिकारियों के साथ ही आतंकवादी संगठन ने भी इसकी पुष्टि कर दी है।
अफगानिस्तान के मुख्य कार्यकारी अब्दुल्ला अब्दुल्ला एवं अफगान खुफिया एजेंसी और पाकिस्तानी अधिकारियों के साथ ही तालिबान ने कहा कि मुल्ला मंसूर पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत में अमेरिकी ड्रोन हमले में मारा गया है।
अफगानिस्तान राष्ट्रीय सुरक्षा निदेशालय (एनडीएस) ने कहा कि मंसूर शनिवार को पाकिस्तान के बलूचिस्तान के अहमद वाल कस्बे में अमेरिकी ड्रोन हमले में मारा गया।
एनडीएस के बाद अब्दुल्ला एवं रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता दौलत वजीरी ने कहा कि मुल्ला मंसूर शनिवार को हमले में मारा गया।
खुफिया एजेंसी की रपट के आधार पर अफगानिस्तान के मुख्य कार्यकारी अधिकारी अब्दुल्ला अब्दुल्ला ने रविवार को कहा कि बलूचिस्तान की राजधानी क्वेटा के पास अमेरिकी ड्रोन हमले में मंसूर मारा गया।
खामा प्रेस के मुताबकि, अफगानिस्तान की खुफिया एजेंसी द्वारा मंसूर के मारे जाने के बयान के बाद अब्दुल्ला का यह बयान आया है।
इससे पहले पाकिस्तान की मीडिया ने रविवार को बलूचिस्तान प्रांत में अमेरिकी हवाई हमले में तालिबान सरगना मुल्ला मंसूर के मारे जाने से इनकार करते हुए कहा कि इसमें एक टैक्सी चालक तथा एक यात्री की मौत हो गई, मुल्ला मंसूर की नहीं।
इससे पहले रविवार को ‘सीएनएन’ ने एक अमेरिकी अधिकारी के हवाले से कहा था कि पाकिस्तान-अफगानिस्तान सीमा के दूरवर्ती क्षेत्र में स्थित दक्षिण-पश्चिमी शहर अहमद वाल में किए गए हवाई हमले में मंसूर मारा गया।
अधिकारी ने कहा कि मंसूर को निशाना बनाकर यह हमला किया गया था। मंसूर के साथ वाहन में सवार एक अन्य शख्स के भी मारे जाने का अंदेशा है।
वहीं, पाकिस्तानी उर्दू चैनल ‘समा टीवी’ की रपट के मुताबिक, दो लोगों के शवों को नुशकी के एक अस्पताल ले जाया गया, जहां अधिकारियों ने उनके पहचान पत्र से उनकी पहचान की।
रपट के मुताबिक, टैक्सी चालक की पहचान चमन निवासी मुहम्मद आजम और यात्री की पहचान वली मुहम्मद के रूप में की गई है।
स्थानीय उर्दू टीवी चैनल ’92 न्यूज’ ने एक अज्ञात तालिबान कमांडर के हवाले से मंसूर के मारे जाने का खंडन किया।
‘अलजजीरा’ ने भी तालिबान सरगना मंसूर की मौत की खबरों का खंडन किया है।
मुल्ला मंसूर को तालिबान के पूर्व सरगना मुल्ला उमर के मारे जाने के एक दिन बाद 30 जुलाई, 2015 को तालिबान सरगना बनाया गया था।
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