दमिश्क, 6 फरवरी (आईएएनएस)। सीरिया में आतंकवादी संगठन इस्लामिक स्टेट (आईएस) लगातार कमजोर पड़ता जा रहा है। आतंकवादी संगठन सीरिया-तुर्की की सीमा पर अपने कब्जे वाले दो-तिहाई कस्बों पर अपना नियंत्रण खो चुका है।
साल 2015 की शुरुआत से ही आईएस की उपस्थिति घटनी शुरू हो गई थी, क्योंकि सीरिया-तुर्की की सीमा पर 250 किलोमीटर क्षेत्र में आईएस का कब्जे वाला क्षेत्र घटकर मात्र 70 किलोमीटर तक पहुंच गया।
रपट के मुताबिक, “इन इलाकों का इस्तेमाल आतंकवादी संगठन हथियार व लड़ाकों को लाने के लिए करता है।”
आईएस के पास तुर्की से जुड़े तीन क्रॉसिंग हैं, जिसमें पहला हलवानिये कस्बे के निकट जाराब्लुस शहर के पश्चिम में है। इस क्रॉसिंग का इस्तेमाल आतंकवादी समूह चिकित्सा व सैन्य आपूर्ति के लिए करता है, जिसकी पहरेदारी आईएस के बेहद प्रशिक्षित आतंकवादी करते हैं और इसका समूह के नेतृत्व से सीधा संपर्क है।
दूसरा क्रॉसिंग पहले के निकट में हाजी कस्बे के पास है। इस क्रॉसिंग के सहारे समूह लड़ाकों को लाने व भेजने का काम करता है, खासकर वैसे लोगों को जिन्हें चिकित्सा मदद की जरूरत होती है।
रपट के मुताबिक, आईएस समूह वापस जानेवाले लड़ाकों की चिकित्सा स्थिति की जांच करता है, क्योंकि किसी भी लड़ाके को अपने कमांडर की लिखित मंजूरी के बिना क्रॉसिंग पार करने की इजाजत नहीं है।
तीसरा क्रॉसिंग आयासेह कस्बे के निकट है, जिसका इस्तेमाल आईएस उन नागरिकों के परिवहन के लिए करता है, जो तुर्की के आसपास आईएस के शासन वाले इलाके में रहते हैं।
सीरिया की सरकारी सेना अल-बाब शहर की तरफ बढ़ रही है, जो तुर्की के निकट उत्तरी अलेप्पो में आईएस का एक मजबूत गढ़ माना जाता है।
अल-कायदा से संबद्ध नुसरा फ्रंट व अहरार अल-शाम आंदोलन भी सीरिया व तुर्की की सीमा पर बसे कस्बों पर से अपना नियंत्रण खो रहे हैं।
अलेप्पो में रतयान पर सेना का नियंत्रण अल-कायदा से संबद्ध नुसरा फ्रंट के लिए एक और झटका है, जहां सीरियाई सेना को लेबनान का हिज्बुल्ला समूह सहयोग कर रहा है और ये तुर्की से मिलने वाली आपूर्ति लाइन को काटने की तरफ तेजी से बढ़ रहे हैं।
रपट के मुताबिक, ब्रिटेन की मानवाधिकार संस्था सीरियन ऑब्जर्वेटरी फॉर ह्यूमन राइट्स ने कहा कि हिज्बुल्ला तथा ईरानियन रिपब्लिकन गार्ड्स के लड़ाकों ने उत्तरी अलेप्पो से आतंकवादियों को खदेड़ने में सीरियाई सेना की मदद की है।
उत्तरी अलेप्पो के दवेर, जैतून, हरदातनेन, ताल जबेन तथा मसरत अल-खान कस्बों पर नियंत्रण के बाद सीरियाई सेना को रतयान पर नियंत्रण व मायेर की तरफ बढ़ने में मदद मिली है। इन सफलता से शिया कस्बे नुबुल व जाहरा पर नियंत्रण करने में मदद मिलेगी, जहां तीन साल से नुसरा फ्रंट ने घेरेबंद कर रखी है।
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