केप टाउन, 11 अप्रैल (आईएएनएस)। दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति जैकब जुमा ने देश में नस्लवाद के पुनरुत्थान के खिलाफ चेतावनी दी है।
जुमा ने गौतेंग प्रांत में क्रिस हानी पुष्पांजलि समारोह के मौके पर कहा, “दुखद है कि हमने गैर नस्ली समाज का जो सपना देखा था, हम उसके निर्माण में अब तक सफल नहीं हुए हैं।”
साउथ अफ्रीकन कम्युनिस्ट पार्टी (एसएसीपी) के महासचिव दिवंगम हानी की बोक्सबर्ग में उनके घर में 10 अप्रैल, 1993 को हत्या कर दी गई थी। उनके निधन के कारण वे वार्ताएं बीच में ही अधूरी रह गईं, जिनसे 1994 में रंगभेद खत्म हुआ था।
समाचार एजेंसी सिन्हुआ के मुताबिक, जुमा ने कहा कि हानी नस्लवाद की लड़ाई के सच्चे योद्धा थे, कट्टर नस्लवादियों ने उनकी जान ले ली।
जुमा ने पिछले सप्ताह हुए व्यापक प्रदर्शनों को नस्लवाद से जोड़ते हुए कहा कि इससे साबित होता है ‘नस्लवाद हकीकत है और हमारे देश में अब भी है।’
हजारों दक्षिण अफ्रीकियों ने जुमा के इस्तीफे की मांग को लेकर पिछले शुक्रवार को देश के विभिन्न हिस्सों में मार्च किया था।
एसएसीपी नेताओं ने हालांकि हानी की याद में जुमा के साथ मंच साझा किया, लेकिन एसएसीपी ने कहा कि इससे जुमा के इस्तीफे की उनकी मांग में कोई बदलाव नहीं आएगा।
जुमा ने 31 मार्च को अपने मंत्रिमंडल में परिवर्तन किया था, जिसके तहत उन्होंने 10 मंत्रियों और 10 उप मंत्रियों को हटा दिया था, जिसके बाद से उन पर इस्तीफे का दबाव बनाया जा रहा है।
जुमा ने कहा कि प्रदर्शनकारियों द्वारा दिखाई गई कई तख्तियों और पोस्टर्स में ‘उन्हीं मान्यताओं को दर्शाया गया था, जो हमें लगा था कि 1994 में दफन हो गई थीं।’
कुछ पोस्टर्स में अश्वेतों को लंगूरों के रूप में दर्शाया गया था।
जुमा ने कहा, “स्पष्ट है कि हमारे कुछ श्वेत साथी अश्ववेतों को इंसान नहीं समझते।”
जुमा के मुताबिक, दक्षिण अफ्रीकी सरकार ने घृणा अपराध और घृणास्पद भाषण रोकथाम और निवारण विधेयक पेश किया है।
इस विधेयक के कानून बनने के बाद नस्ल, लिंग, राष्ट्रीयता और धर्म के आधार पर भेदभाव करना कानूनन जुर्म होगा।
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