वाशिंगटन, 16 अप्रैल (आईएएनएस)। केंद्रीय वित्तमंत्री अरुण जेटली ने यहां कहा कि भारत को जनसांख्यिकी बदलाव का लाभ उठाने के लिए विकास दर का लक्ष्य दहाई अंकों में तय करने की जरूरत है।
एक सम्मेलन में उन्होंने कहा, “देश में एक बड़ा जनसांख्यिकी बदलाव होने वाला है। 15-59 साल की कामकाजी आबादी का अनुपात 2001 के 58 फीसदी से बढ़कर 2021 तक 64 फीसदी होने वाला है और कामकाजी आबादी में 2011-2016 के बीच 6.35 करोड़ नए लोग शामिल होंगे।”
यहां एक थिंक टैंक सेंटर फॉर स्ट्रैटेजिक एंड इंटरनेशनल स्टडीज द्वारा आयोजित सम्मेलन में बुधवार को उन्होंने कहा, “भारत को कम से कम दहाई अंकों वाली नई सामान्य विकास दर का लक्ष्य बनाना होगा। पांच फीसदी, छह फीसदी या सात फीसदी विकास दर से भारत इस चुनौती का सामना नहीं कर सकता।”
उन्होंने कहा, “आने वाले वर्षो में भारत के पास 9-10 फीसदी सामान्य विकास दर हासिल करने की क्षमता है।”
मंत्री अंतर्राष्ट्रीय मुद्राकोष (आईएमएफ) और विश्वबैंक की बसंत बैठक में शामिल होने के लिए वाशिंगटन में हैं।
आईएमएफ की मंगलवार को जारी विश्व आर्थिक परिदृश्य के मुताबिक, 1999 के बाद पहली बार भारत की विकास दर इस साल चीन से अधिक होगी।
रिपोर्ट के मुताबिक, मौजूदा कारोबारी साल में देश की विकास दर 7.5 फीसदी रहेगी, जो 2014 में 7.2 फीसदी थी।
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