देवों के दरबार में लगे भक्तों की कतार

12_10_2012-templlltप्रदेश के हर गांव-शहर में राधा और कृष्ण की पूजा तो होती ही है साथ ही अनेक भव्य मंदिर भी निर्मित हैं। राधा और कृष्ण में इसी आस्था और श्रद्धा का जीता जागता उदाहरण है महेंद्रगढ़ के कनीना में स्थित प्राचीन राधा-कृष्ण मंदिर। रेलवे स्टेशन कनीना मंडी के पास स्थित यह प्रसिद्ध मंदिर अनवरत चलने वाले धार्मिक कार्यक्रमों के कारण प्रसिद्धि को प्राप्त है। पांच देव दरबारों वाले राधा-कृष्ण मंदिर में हनुमान जयंती, गोवर्धन अन्नकूट, कृष्ण जन्माष्टमी, शरद पूर्णिमा व नवरात्र पूजन सहित अनेक धार्मिक कार्यक्रम एवं पर्व वर्ष भर चलते रहते हैं। नाभा रियासत के समय में निर्मित इस मंदिर में कभी तीन देव दरबार होते थे जो आज बढ़कर पांच हो गए हैं। कनीना कस्बे से महज दो किलोमीटर की दूरी पर रेलवे स्टेशन के पास कुछ वर्ष पूर्व कनीना अनाज मंडी निर्मित की गई थी जिसमें एक स्थान पर मंदिर की जगह निर्धारित की गई थी। बाद में इस जगह पर राधा-कृष्ण मंदिर का निर्माण करवाया गया। इस मंदिर का निर्माण करवाने वाले गुढ़ा निवासी मुन्नालाल के परिजन गोविंदराम आज भी मंदिर के निर्माण व देखरेख में पूरी मदद कर रहे हैं। इस मंदिर में वर्ष भर कोई न कोई धार्मिक उत्सव निरंतर मनाया जाता है या कथा व प्रवचन चलते ही रहते हैं। मंदिर में सजे मां भगवती दरबार की नवरात्रों में विशेष पूजा की जाती है। भक्तजन राम दरबार की यूं तो प्रतिदिन पूजा करते हैं लेकिन राम नवमी के अवसर पर पूजा विधान बढ़ जाता है। प्रतिवर्ष हनुमान जयंती के अवसर पर भी भंडारा आयोजित किया जाता है और भक्तों को प्रसाद वितरित किया जाता है। मंडीवासी अपने हाथों से प्रसाद का निर्माण करते हैं और सैकड़ों श्रद्धालुओं को प्रसाद ग्रहण कराया जाता है। इसी तरह से शरद पूर्णिमा के अवसर पर मंदिर में एक क्विंटल दूध की खीर का प्रसाद वितरित किया जाता है। इस खीर को ग्रहण करने श्रद्धालु और रोगी पहुंचते हैं। इस खीर का शरीर पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है। दीपावली से अगले दिन गोवर्धन पर्व पर यहां अन्नकूट का प्रसाद वितरित किया जाता है। कनीना मंडी में स्थित राधा-कृष्ण का यह मंदिर असंख्य श्रद्धालुओं की आस्था को खुद में समेटे हुए है।12_10_2012-templllt

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