नई दिल्ली, 21 जून (आईएएनएस)। भारत को लंबी अवधि की शेल गैस नीति की जरूरत है, जो समग्र हो और जिसमें गैस कीमत, पर्यावरण एवं भूमि अधिग्रहण जैसे मुद्दों पर अन्य देशों के अनुभव शामिल हों। आईसीआईसीआई सिक्युरिटीज ने रविवार को एक रपट में यह जानकारी दी।
आईसीआईसीआई की रपट में कहा गया है, “भारत को लंबी अवधि की शेल गैस नीति की जरूरत है, जो समग्र हो और जिसमें अन्य देशों के गैस कीमत, पर्यावरण सुरक्षा, भूमि अधिग्रहण के मुद्दों से जुड़े अनुभव शामिल हों।”
रपट के मुताबिक, “शेल गैस में संभावनाएं हैं, लेकिन यह सर्वेसर्वा नहीं है, जिससे भविष्य में भारत के ऊर्जा संकट का समाधान होगा।”
इस रपट में इस बात को वर्णित किया गया है कि किस तरह से नई शताब्दी में अमेरिका में शेल गैस क्रांति प्रौद्योगिकीय सफलता का परिणाम है। रपट में बताया गया कि देश में मौजूद भूस्वामी अपनी संपत्ति के लिए खनिज अधिकार का पट्टा दे सकते हैं।
सरकारी कंपनी ओएनजीसी ने अनुमान लगाया है कि देश का शेल गैस भंडार खंभात, कृष्णा-गोदावरी, कावेरी, गंगा, असम और असम अराकान बेसिन में 1875 खरब घन फुट है।
रपट में कहा गया है, “शेल गैस की खोज और भारत में तेल अभी प्रारंभिक अवस्था में है। शेल गैस की खोज और तेल के लिए ओएनजीसी का निवेश 2014 के अंत तक 79 करोड़ रुपये रहा।”
रपट में कहा गया है कि शेल गैस की प्राप्ति बड़े पैमाने पर जल के दोहन से होती है, वह भी उस जल में जिसमें रेडियोधर्मी तत्वों सहित अतिरिक्त प्रदूषक होते हैं।
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