काठमांडू-नेपाल के Gen Z आंदोलन ने पीएम ओपी शर्मा कोली को इस्तीफा देने को मजबूर कर दिया है. पर इस आंदोलन को लेकर कई सवाल हैं जो लोगों के मन में उठ रहे हैं. जैसे क्या यह आंदोलन पूरी तरह घरेलू असंतोष, सोशल मीडिया बैन का नतीजा है? या इसके पीछे किसी बाहरी शक्ति या देश जैसे अमेरिका या चीन का हाथ हो सकता है? साथ ही इस आंदोलन की टाइमिंग पर भी सवाल उठ रहे हैं? आइये इन सवालों का जवाब जानने की कोशिश करते हैं.
नेपाल में पिछले एक हफ्ते से सोशल मीडिया पर नेपो किड्स और नेपो बेबीज ट्रेंड कर रहे थे, जिससे लगता है कि लोगों में असंतोष था. पोस्टर में भी प्रदर्शनकारियों के पोस्टरों में भी भाई-भतीजावाद, बेरोजगारी और नेपोटिजम के खिलाफ गुस्सा नजर आ रहा था. अभी तो ये लगता है कि नेपाल में ये जेन जी आंदोलन खुद बखुद शुरू हुआ है. अब फायदा उठाने के लिए घरेलू और बाहरी ताकतें सक्रिय हो सकती हैं.
अमेरिका भी नेपाल में मेलेनियम चैलेंज कॉरपोरेशन के तहत 50 अरब डॉलर का भारी-भरकम निवेश कर रहा है. विशेषज्ञों को लगता है कि यह अमेरिका और चीन के निवेश के टकराव का मामला भी हो सकता है. कुछ लोगों को लगता है कि बीजिंग इस आंदोलन को भड़का रहा है ताकि नेपाल में अमेरिका निवेश कमजोर हो. पर नेपाल की अस्थिरता चीन को भी परेशान कर सकती है.
अब आंदोलन की टाइमिंग पर भी सवाल उठ रहे हैं क्योंकि 16 सितंबर को ओली भारत के दौरे पर आने वाले थे. जब प्रॉ मोनार्की समर्थन आंदोलन हो रहे थे, तो उसे भारत से जोड़ा गया क्योंकि राजशाली समर्थकों को प्रॉ-इंडिया माना जाता है.
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