धन की कमी के कारण संयुक्त राष्ट्र के शांति निर्माण प्रयासों में रुकावट : भारत

अरुल लुईस

अरुल लुईस

संयुक्त राष्ट्र, 25 अप्रैल (आईएएनएस)। भारत ने संयुक्त राष्ट्र में एक उच्च स्तरीय बैठक के दौरान कहा कि संयुक्त राष्ट्र के शांति निर्माण के प्रयासों के लिए पर्याप्त धन मुहैया कराने की राजनीतिक इच्छा शक्ति की कमी के कारण इसमें रुकावट आ रही है।

भारतीय विदेश मंत्रालय में अतिरिक्त सचिव ए.गितेश सरमा ने मंगलवार को शांति निर्माण और शांति कायम रखने के विषय पर आयोजित एक उच्च स्तरीय बैठक में कहा, “संयुक्त राष्ट्र के शांति निर्माण प्रयासों के लिए उपलब्ध धन शांति कार्यो के लिए संयुक्त राष्ट्र के वार्षिक बजट का एक प्रतिशत भी नहीं है।”

संयुक्त राष्ट्र महासचिव और महासभा अध्यक्ष मिरोस्लाव लाजाक ने भी शांति निर्माण प्रयासों के लिए जरूरी धन की कमी को लेकर दुख जताया।

लाजाक ने कहा कि शांति निर्माण के लिए लक्षित 50 करोड़ डॉलर भी उपलब्ध नहीं हो पाता क्योंकि अंतर्राष्ट्रीय समुदाय संघर्षो से बचने के लिए पर्याप्त धन उपलब्ध नहीं करा रहे।

गुटेरेस ने कहा कि संघर्षो से निपटने और इसके बाद मानवीय सहायता मुहैया कराने, शांति कायम रखने और शरणार्थियों की मदद करने के प्रयासों पर काफी अधिक – करीब 233 अरब डॉलर खर्च होता है।

उन्होंने कहा कि बेहतर है कि शांति निर्माण के प्रयासों के जरिए संघर्षो को रोकने पर निवेश किया जाए क्योंकि इससे जिंदगियां बचती हैं।

उन्होंने संयुक्त राष्ट्र सदस्यों से शांति निर्माण कोष के लिए हर साल 50 करोड़ डॉलर की राशि जुटाने में योगदान देने की अपील की।

गुटेरेस की अपील का समर्थन करते हुए सरमा ने उनके द्वारा जनवरी में पेश की गई रिपोर्ट में दिए गए धन जुटाने के विकल्पों का स्वागत किया और कहा कि अपर्याप्त धन की समस्या से निपटने के लिए इन पर गंभीरता से विचार करने की जरूरत है।

भारत शांति निर्माण कोष के लिए अब तक 50 लाख डॉलर का योगदान दे चुका है।

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