नई दिल्ली, 28 जून (आईएएनएस)। निर्यात में लगातार दर्ज की जा रही गिरावट के कारण कंपनियों में छंटनी की जा सकती है और चालू खाता घाटा पर दबाव बढ़ सकता है। यह चेतावनी फेडरेशन ऑफ इंडियन एक्सपोर्ट ऑर्गनाइजेशन (एफआईईओ) ने दी है।
यह बयान भारतीय रिजर्व बैंक के उस बयान के एक दिन बाद आया है, जिसमें गवर्नर रघुराम राजन ने कहा था कि वैश्विक अर्थव्यवस्था 1930 के दशक वाली महामंदी के मुहाने पर खड़ी है।
एफआईईओ के अध्यक्ष एस.सी. रल्हन ने एक बयान में यहां शनिवार को कहा, “वैश्विक अर्थव्यवस्था जो अब तक चुनौतीपूर्ण चरण से गुजर रही थी, अब खतरनाक चरण में प्रवेश कर रही है, भारत सहित पूरी दुनिया के लिए अशुभ है।”
रल्हन ने कहा कि ऑर्डर की मौजूदा स्थिति को देखते हुए उन्हें यह चिंता हो रही है कि आने वाले महीने में निर्यात में काफी गिरावट आएगी, जिसके कारण कर्मचारियों की छंटनी हो सकती है।
उन्होंने कहा, “देश के लिए यह एक धक्के के समान होगा, जिसने रोजगार सृजन को अपनी प्राथमिकता बना रखी है और हर साल एक करोड़ रोजगार पैदा करने का लक्ष्य रखा है।”
रल्हन ने कहा, “यदि निर्यात घटता रहा, तो आज या कल इसका दबाव चालू खाता घाटा पर भी पड़ेगा और इससे देश के पुनर्निर्माण की प्रक्रिया पटरी से उतर जाएगी, क्योंकि निर्यात से जो मजबूती मिलती है, वह पूंजी भंडार से नहीं मिल सकती।”
मई महीने में साल-दर-साल आधार पर निर्यात 20 फीसदी से अधिक घटकर 22.35 अरब डॉलर दर्ज किया गया, जो एक साल पहले समान महीने में 27.99 अरब डॉलर था।
इस साल के प्रथम दो महीने (अप्रैल-मई) में निर्यात 17.21 फीसदी गिरावट के साथ 44.40 अरब डॉलर रहा।
राजन ने पिछले दिनों कहा था कि विकसित देशों के केंद्रीय बैंकों द्वारा अपनाई जा रही ढीली मौद्रिक नीति के कारण अर्थव्यवस्था में एक बड़ा संकट पैदा हो सकता है। उन्होंने इस बारे में खास तौर से अमेरिका, ब्रिटेन और जापान के केंद्रीय बैंकों का उल्लेख किया।
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