नई दिल्ली, 8 नवंबर – नीलम कोठारी की गिनती हिंदी सिनेमा की हसीन और मासूम अदाकाराओं में की जाती है। हांगकांग में जन्मीं नीलम यूं हीं छुट्टियों में घूमने मुंबई आईं थीं। इसी दौरान उनकी मुलाकात फिल्म निर्माता रमेश बहल से हुई। इसके बाद कुछ ऐसा हुआ कि वह मुंबई की ही होकर रह गईं।
नीलम और रमेश की मुलाकात का किस्सा भी दिलचस्प है। हुआ यूं कि नीलम और रमेश एक ही इमारत में रह रहे थे। नीलम को देखते ही निर्माता रमेश ने उन्हें अपनी फिल्म में लेने का फैसला किया। लेकिन यह काम भी आसान नहीं था।
हिंदी फिल्मों के दर्शक होने के बावजूद नीलम के माता-पिता अपनी बेटी को इस पेशे में नहीं भेजना चाहते थे। दूसरी ओर नीलम भी दुविधा में थीं, क्योंकि उन्हें हिंदी बोलने में मुश्किल होती थी। बात नहीं बनी और वह परिवार से साथ वापस हांगकांग चली गईं।
लेकिन किस्मत ने नीलम के लिए कुछ और ही फैसला कर रखा था। कुछ दिनों बाद नीलम का परिवार हांगकांग से बैंकॉक चला गया। नीलम यहां के जीवनशैली में ढलने की कोशिश करने लगीं और तभी उन्हें फिर से रमेश की पेशकश की याद आई। फिर क्या था, नीलम अगली बार फिर मुंबई आईं और रमेश की फिल्म करने का फैसला कर लिया।
नीलम ने 1984 में रमेश की फिल्म ‘जवानी’ (1984) से रुपहले पर्दे पर आगाज किया। लेकिन यहां शायद किस्मत नीलम को आजमाना चाहती थी। नीलम की पहली फिल्म असफल रही। पहली फिल्म में हाथ लगी निराशा के बाद नीलम फिर से वापस जाने की तैयारी कर रही थीं, तभी निर्देशक प्राणलाल मेहता ने अपी फिल्म ‘लव 86’ की पेशकश की। फिल्म में नीलम ने गोविंदा के साथ काम किया और यह फिल्म सफल रही।
इस फिल्म में गोविंदा और नीलम की जोड़ी दर्शकों को काफी पंसद आई। इसके बाद नीलम ने गोविंदा के साथ ‘इल्जाम'(1986), ‘सिंदूर’, खुदगर्ज (1987), ‘हत्या’ (1988), ‘फर्ज की जंग’, ताकतवर (1989) ‘दो कैदी’ (1989) सहित 14 फिल्मों में काम किया, जिसमें से आठ फिल्में हिट रहीं। कुछ सफल और कुछ असफल फिल्मों के साथ हिंदी सिनेमा में नीलम का कारवां चलता रहा।
नीलम के मासूम चेहरे और मासूम अदाएं दर्शकों को पसंद आ रही थीं। गोविंदा के अलावा चंकी पांडे के साथ भी नीलम की जोड़ी हिट रही। उन्होंने चंकी पांडे के साथ आठ फिल्में की, जिनमें से पांच हिट रहीं। चंकी और नीलम की फिल्मों में ‘आग ही आग’ (1987), ‘पाप की दुनिया’ (1988), ‘खतरों के खिलाड़ी’ (1988), ‘मिट्टी और सोना ओर ‘घर का चिराग’ (1989) शुमार हैं।
खूबसूरती और मासूमियत के अलावा नृत्य कौशल भी हिंदी फिल्मों के लिए नीलम का ‘प्लस प्वाइंट’ रहा।
नीलम ने सलमान खान के साथ आई ‘एक लड़का एक लड़की’ फिल्म दर्शकों को काफी पंसद आई। 1990 के दशक में नीलम की ‘इंद्रजीत’, ‘अग्निपथ’, ‘संतान’ और ‘रणभूमि’ जैसी फिल्में भी हिट हुईं। नीलम ने 1998 में आई शाहरुख खान, काजोल और रानी मुखर्जी अभिनीत जबरदस्त हिट फिल्म ‘कुछ कुछ होता है’ में भी छोटा सा किरदार निभाया था। 1999 में आई नीलम की पारिवारिक फिल्म ‘हम साथ-साथ हैं’ भी काफी हिट रही। नीलम आखिरी बार 2001 में फिल्म ‘कसम’ में नजर आई थीं।
इस दौरान नीलम ने ब्रिटेन एक व्यवसायी के बेटे ऋषि सेठिया के शादी की, लेकिन उनकी पहली शादी असफल रही और कुछ ही समय बाद टूट गई। नीलम ने 24 जनवरी, 2011 को अभिनेता समीर सोनी के साथ ब्याह रचाया। दोनों ने दो सितंबर 2013 को एक बेटी को गोद लिया, जिसका नाम उन्होंने अहाना रखा है।
अब नीलम ने फिल्में छोड़कर अपने तीन पीढ़ियों के पैतृक आभूषण व्यवसाय को आगे बढ़ाते हुए इस व्यवसाय की ओर रुख किया है। अपने पैतृक व्यवसाय में उन्हें भी दिलचस्पी थी और इसे बेहतर तरीक से करने के लिए उन्होंने मुंबई से जूलरी डिजाइनिंग का कोर्स भी किया।
नए करियर की शुरुआत करते हुए 2004 में नीलम ने मुंबई में नीलम ज्वेलर्स के नाम से अपना शोरूम शुरू किया और उसके बाद 24 अगस्त, 2011 में ‘नीलम कोठारी फाइन ज्वेलर्स’ के नाम से अपना जूलरी स्टोर खोला और फिलहाल नीलम का ध्यान अपने व्यवसाय पर है।
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