काठमांडू/नई दिल्ली 3 जनवरी (आईएएनएस)। गुड़गांव के एक अस्पताल में अपनी चोटों का इलाज करा रहे नेपाल की सद्भावना पार्टी के अध्यक्ष राजेंद्र महतो ने रविवार को इस बात का सख्ती से खंडन किया कि नेपाल में नए संविधान के प्रावधानों के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे चार दलों के संयुक्त लोकतांत्रिक मधेस मोर्चे में फूट पड़ गई है।
महतो का यह बयान काठमांडू से आई उन मीडिया रपटों के बाद आया है, जिनमें कहा गया है कि चार महीने से नेपाल के तराई क्षेत्र में मधेस समुदाय के लिए संविधान में समानुपातिक प्रतिनिधित्व और राज्यों के फिर से सीमांकन के लिए लड़ रहे मोर्चे में फूट पड़ गई है। इसकी वजह यह है कि राजेंद्र महतो के नेतृत्व वाली सद्भावना पार्टी ने अपना आंदोलन अलग से चलाने का फैसला किया है।
दिल्ली के पास गुड़गांव के मेदांता अस्पताल में भर्ती महतो ने आईएएनएस से कहा, “मधेसी मोर्चा एकजुट है और एकजुट रहेगा। इसका बीते चार महीने से चल रहा संघर्ष जारी रहेगा।”
महतो 26 दिसंबर को बिराटनगर में पुलिस से झड़प में घायल हो गए थे। मेदांता अस्पताल में उनका इलाज चल रहा है।
महतो ने कहा, “हमारा संघर्ष ऐतिहासिक है। हम अपना लक्ष्य हासिल करेंगे..अपनी वाजिब मांगें पूरी होने तक हमने अपना आंदोलन जारी रखने की तैयारी की हुई है।”
महतो ने कहा कि पहले से तय आंदोलन का कार्यक्रम बदला नहीं जाएगा। उन्होंने नेपाली मीडिया में आई इन खबरों को गलत बताया कि उन्होंने इसमें बदलाव की सलाह दी है।
काठमांडू से मिली मीडिया रपट में कहा गया था कि सद्भावना पार्टी ने रविवार को कहा कि वह प्रदर्शन में मारे गए लोगों की याद में प्रार्थना सभा, अनशन, हस्ताक्षर अभियान और सोशल मीडिया के जरिए मधेसी आंदोलन को अंतर्राष्ट्रीय रूप देने जैसे अहिंसक उपायों का सहारा लेगी।
महतो ने कहा कि उन्होंने मधेसी प्रदर्शनकारियों के सामने इन गतिविधियों की बात धारन के बी.पी.कोईराला इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ साइंस में भर्ती रहने के दौरान ही कही थी। इसका मकसद हमारे आंदोलन को एक शांतिपूर्ण रंग देना था।
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