राजधानी से 114 किलोमीटर की दूरी पर स्थित इस सीमा बिंदु पर फंसे चीन के माल के 300 वाहनों का नेपाल आना शुरू हो गया है।
गुरुवार की शाम तक कपड़े, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण, जूते-चप्पल और अन्य खाद्य सामग्री से भरे 88 ट्रकों ने वीरान पड़े तातोपानी क्षेत्र के चीन-नेपाल मैत्री पुल को पार किया।
तातोपानी में सीमा शुल्क के मुख्य अधिकारी राज पोखरेल ने गुरुवार को बताया, “यह सीमा बिंदु व्यापारियों और सिंधुपालचोक जिले के हजारों स्थानीय लोगों की जीवनरेखा है। ये पूरी तरह से सीमा-पार व्यापार और पर्यटन पर निर्भर करते हैं। इसलिए हम उम्मीद कर रहे हैं कि इसे स्थायी रूप से खोला जाएगा।”
पिछले साल आए विनाशकारी भूकंप से पहले तातोपानी के इस सीमा शुल्क बिंदु पर प्रतिदिन सामान से लदे लगभग 100 खेपों का आवागमन होता है, जिससे देश को सालाना लगभग छह अरब रुपये का राजस्व प्राप्त होता था।
साल 2015 के विनाशकारी भूकंप से सीमा व्यापार काफी प्रभावित हुआ था। एक साल बीतने के बाद भी सीमा बिंदु पर माल के आवागमन के लिए अधिक सहूलियतें नहीं मिली।
अपने माल की आपूर्ति के लिए पिछले सप्ताह से सैकड़ों व्यापारी और ड्राइवर सीमा क्षेत्र में इकट्ठे हुए हैं। हालांकि इस माल की कोई सटीक गणना नहीं है लेकिन माना जा रहा है कि यह माल लगभग 2 अरब नेपाली रुपये का है।
पिछले 16 साल से इस सीमा व्यापार पर निर्भर राजेंद्र श्रेष्ठ कहते हैं, “मैं अपने माल की आपूर्ति के लिए पिछले 10 दिनों से यहां मौजूद हूं। मैंने बैंक के माध्यम से कर निस्तारण के लिए तीन बार काठमांडू की यात्रा की थी, लेकिन फिर भी मेरे ट्रक को आगे जाने नहीं दिया गया है। मैं ड्राइवरों और लोडरों का सभी खर्च वहन कर रहा हूं। यह काफी महंगा है।”
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