काठमांडू, 27 मई (आईएएनएस)। नेपाल के दो राजनीतिक दलों ने प्रधान न्यायाधीश सुशीला कार्की के खिलाफ महाभियोग का अपना प्रस्ताव वापस लेने का निर्णय लिया है।
दोनों दलों ने अप्रैल में कार्की के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव पेश किया था, जिसे उन्होंने शनिवार को वापस लेने का फैसला किया।
इसके साथ ही नेपाल में न्यायपालिका और विधायिका के बीच चल रहे बेवजह के विवाद पर विराम लगने की संभावना है।
शनिवार को दोनों दलों के नेताओं ने मुख्य विपक्षी दल, नेपाली कम्युनिस्ट पार्टी-एकीकृत (मार्क्सवादी-लेनिनवादी) के साथ बैठक की और निर्णय लिया कि शनिवार शाम या रविवार तक वे अपना प्रस्ताव वापस ले लेंगे।
सीपीएन-यूएमएल के संसदीय दल के नेता सुभाष नेमबांग ने प्रधानमंत्री पुष्प कमल दहाल ‘प्रचंड’ के हवाले से कहा, “प्रधान न्यायाधीश कार्की के खिलाफ लाया गया महाभियोग प्रस्ताव शनिवार शाम या रविवार सुबह तक वापस ले लिया जाएगा।”
नेपाली कांग्रेस के नेता शेर बहादुर देउबा के साथ हुए समझौते के सम्मान में बुधवार को प्रधानमंत्री पद से इस्तीफे की घोषणा कर चुके प्रचंड ने कहा कि महाभियोग प्रस्ताव वापस लिए जाने की प्रक्रिया शुरू भी हो चुकी है।
नेपाल की शीर्ष अदालत द्वारा पुलिस प्रमुख की नियुक्ति के सरकार के फैसले को रद्द करने के बाद सत्तारूढ़ नेपाली कांग्रेस और नेपाली कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी सेंटर) के सांसदों ने प्रधान न्यायाधीश के खिलाफ 30 अप्रैल को संसदीय सचिवालय में महाभियोग प्रस्ताव दर्ज कराया था।
महाभियोग का प्रस्ताव पेश होने के साथ ही नेपाल की पहली महिला प्रधान न्यायाधीश कार्की को निलंबित कर दिया गया था, हालांकि शीर्ष अदालत ने एक अन्य फैसला सुनाते हुए उन्हें बहाल कर दिया था।
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