काठमांडू, 5 मई (आईएएनएस)। नेपाल में आए विनाशकारी भूकंप में हजारों की संख्या में जख्मी हुए लोगों में चिकित्सकों ने जीवनर्पयत मानसिक विकार होने की आशंका जताई है।
काठमांडू, 5 मई (आईएएनएस)। नेपाल में आए विनाशकारी भूकंप में हजारों की संख्या में जख्मी हुए लोगों में चिकित्सकों ने जीवनर्पयत मानसिक विकार होने की आशंका जताई है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) द्वारा जारी प्रारंभिक आंकड़ों के मुताबिक, घायल हुए 14,000 से अधिक लोगों में एक-तिहाई लोगों को नियमित तौर पर ऑर्थोपेडिक उपचार एवं मनोचिकित्सा प्रदान किए जाने की जरूरत होगी।
डब्ल्यूएचओ के आंकड़ों के मुताबिक, इनमें से 12 फीसदी लोगों को रीढ़ की हड्डी में चोटें आई हैं।
चिकित्सकों ने आशंका व्यक्त की है कि अकेले बीर अस्पताल में भर्ती 21 घायलों, जिन्हें सर पर चोटें आई हैं, में से दो के पूरी तरह ठीक होने की संभावना नहीं है।
राजधानी काठमांडू में अनेकों अस्पतालों में घायलों को आर्थोपेडिक उपचार दिए जाने की जरूरत है, हालांकि अभी ऐसे घायलों की ठीक-ठीक संख्या पता नहीं चल सकी है।
इसी तरह मानसिक रूप से अस्वस्थ लोगों का उपचार कर रहे चिकित्सकों ने बताया कि भूकंप के बाद सदमे में गए लोगों की संख्या में इजाफा हुआ है और इसमें लगातार इजाफा होता ही जा रहा है।
25 अप्रैल को आए 7.9 तीव्रता के विनाशकारी भूकंप के बाद से झटकों का आना रुका नहीं है, जिसके कारण त्रासदी में बच गए लोगों में भय और तनाव का मामला और बढ़ा है।
ओम अस्पताल की पुष्पा शर्मा ने कहा कि इस तरह की मानसिक व्याधियां ऐसे विनाशकारी भूकंप के बाद होती हैं तथा इससे पीड़ित लोगों को उपचार दिया जाना चाहिए।
नेपाल में आए भूकंप के कारण हर आयु के लोग मानसिक विकार के शिकार हुए हैं। इनमें भूकंप में बाल-बाल बचे लोग, अपने नजदीकियों को अपने सामने मरता देखने वाले लोग और टेलीविजन तथा समाचार पत्रों में भूकंप की भयावह तस्वीरें देखने के बाद मानसिक विकार का शिकार हुए लोग शामिल हैं।
इसी तरह रीढ़ की हड्डी के ऑपरेशन का इंताजर कर रहे नौ घायलों को भी पुनर्वास की जरूरत है। बीर अस्पताल में वरिष्ठ न्यूरोसर्जन गोपाल रमन शर्मा ने कहा कि रीढ़ की हड्डी में चोटिल लोगों को तत्काल ऑपरेशन की जरूरत है, ताकि वे व्हीलचेयर पर चल-फिर सकें और इससे उनका पुनर्वास आसान होगा।
त्रिभुवन अस्पताल में 11 घायलों को अपना कोई न कोई अंग गंवाना पड़ा है, जिनमें एक पांच वर्ष की बच्ची भी है। वहीं काठमांडू मेडिकल कॉलेज में भी तीन घायलों के अंग काटने पड़े हैं।
चिकित्सकों ने सचेत किया है कि यदि समय पर चिकित्सा न उपलब्ध कराई गई तो इस प्राकृतिक आपदा के कारण जीवनर्पयत विकलांगता झेलने वालों की संख्या में अभी और इजाफा हो सकता है।
अपदा के नौ दिनों बाद भी अस्पताल के बाहर उपचार का इंतजार कर रहे घायलों की लंबी लाइन लगी हुई है, जो चिकित्सकों लिए चिंता का विषय बनी हुई है।
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