नेपाल : 5 महीनों में 400000 से अधिक ने खोई नौकरियां

काठमांडू, 13 जनवरी (आईएएनएस)। नेपाल की सर्वोच्च कारोबारी संस्था का कहना है कि तराई इलाकों में संविधान विरोधी प्रदर्शन और नेपाल-भारत सीमा पर नाकेबंदी के कारण पिछले पांच महीनों में 4,00,000 से भी अधिक नेपालियों को अपनी नौकरी से हाथ धोना पड़ा है।

दक्षिणी तराई इलाके को नेपाल का औद्यौगिक गढ़ माना जाता है, जहां देश की 70 प्रतिशत विनिर्माण इकाइयां मौजूद हैं।

उद्योग नेपाल की अर्थव्यवस्था के सकल घरेलू उत्पाद में 17 प्रतिशत का योगदान देता है।

फेडरेशन ऑफ नेपालीज चैम्बर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (एफएनसीसीआई) ने मंगलवार को कहा कि पिछले पांच महीनों के दौरान लगभग 2,200 विनिर्माण इकाइयों का संचालन बंद हो गया है।

पिछले पांच महीनों से नेपाल का तराई क्षेत्र नए संविधान के विरोध में आंदोलनों की आग में झुलस रहा है।

आंदोलन के चलते मधेसियों ने नेपाल-भारत सीमा पर नाकेबंदी कर दी है और नेपाल के लिए आने वाले माल वाहक ट्रकों को रोक दिया है, जिसके कारण देश में जरूरी वस्तुओं की आपूर्ति बाधित हो गई है।

एफएनसीसीआई ने कहा है कि मधेसियों के विरोध के कारण देश को पिछले पांच महीनों से प्रतिदिन दो अरब रुपये की राजस्व हानि हो रही है।

एफएनसीसीआई की कर और राजस्व समिति के अध्यक्ष सौरभ ज्योति ने कहा कि विरोध प्रदर्शनों के कारण देश की अर्थव्यवस्था को भारी नुकसान हुआ है।

नेपाल राष्ट्र बैंक (एनआरबी) की रपट के मुताबिक, एक दिन भी उद्योग बंद होने पर 1.8 डॉलर मूल्य का घाटा होता है।

ज्योति ने कहा कि देश की अर्थव्यवस्था तेजी से गिर रही है।

एनआरबी के आंकड़ों के अनुसार, निजी क्षेत्र का संचयी घाटा 300 अरब डॉलर पार कर गया है।

तराई क्षेत्र में विरोध प्रदर्शन भड़कने के बाद से औद्योगिक क्षेत्र में 2.5 प्रतिशत की नकारात्मक वृद्धि दर होने की संभावना है।

एनआरबी ने चेतावनी दी है कि मुद्रास्फीति पहले से ही दो अंकों का आंकड़ा छू चुकी है।

बीरगंज वाणिज्य चैंबर के उपाध्यक्ष, सुबोध गुप्ता ने बीरगंज में औद्योगिक इकाइयों को सुरक्षा प्रदान करने में सरकार की नाकामी की आलोचना की है।

वहीं वित्तमंत्री विष्णु पौडल ने निजी क्षेत्र के साथ मिलकर काम करने की जरूरत पर बल देते हुए कहा कि सरकार वर्तमान स्थिति के प्रभाव के बारे में सतर्क है।

पौडल ने कहा, “हम आंदोलन कर रहे मधेसी दलों से बातचीत कर शीघ्र संकट के समाधान के लिए प्रतिबद्ध हैं।”

वित्तमंत्री ने कहा कि अप्रैल 2015 का भूकंप, राजनीतिक अशांति और सीमा पर नाकेबंदी से प्रभावित देश के आर्थिक क्षेत्र को उबारने के लिए 100 अरब रुपये का आर्थिक पुनर्वास कोष स्थापित करने का सरकार का फैसला निजी क्षेत्र के साथ काम करने की सरकार की प्रतिबद्धता को जाहिर करता है।

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