पंजाब में आयकर छापों के विरोध में आढ़तियों ने अनिश्चितकाल तक मंडी बंद की अब लेंगे सुप्रीम कोर्ट की शरण

चंडीगढ़/नई दिल्ली- कड़कड़ाती ठंड के मौसम में बीते चार सप्ताह से दिल्ली की विभिन्न सीमाओं पर केंद्र सरकार के तीन नए और विवादित कानूनों को विरोध कर रहे किसानों के साथ सरकार की असफल बातचीत के बीच पंजाब के आढ़तियों (कमीशन एजेंट) ने आयकर विभाग की छापेमारी के विरोध में अनिश्चितकाल तक मंडियों को बंद करने का फैसला किया है.

दरअसल, पंजाब के पटियाला में आढ़तियों के ठिकानों पर आयकर विभाग ने 19 दिसंबर को छापेमारी की थी. आयकर अधिकारियों के साथ सीआरपीएफ की टीम भी मौजूद थी.

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक आयकर विभाग ने पटियाला जिले में जसविंदर राणा के घर पर छापा मारा. यह छापेमारी रात भर चलती रही. इसके अलावा समाना में आढ़ती एसोसिएशन के प्रधान पवन बंसल के घर पर भी रेड पड़ी.

द हिंदू की रिपोर्ट के अनुसार, आढ़तियों ने आरोप लगाया कि आयकर विभाग की छापेमारी राजनीति से प्रेरित है क्योंकि कई आढ़तिए किसान आंदोलन को खुले तौर पर अपना समर्थन दे रहे हैं.

पंजाब आढ़तिया संघ के अध्यक्ष रविंदर सिंह चीमा ने रविवार को कहा कि बदले की कार्रवाई के विरोध में संघ ने 21 दिसंबर से राज्य भर की मंडियों को बंद करने का फैसला किया है.

चीमा ने कहा, ‘ये आयकर छापे किसान आंदोलन में आढ़तिया की भागीदारी के खिलाफ बदले की कार्रवाई हैं. हम केवल किसानों को समर्थन नहीं दे रहे हैं बल्कि नए कृषि कानूनों से आढ़तियों की अपनी चिंताएं हैं. हम अपने व्यापार और हितों को बचाने के लिए विरोध कर रहे हैं. यह किसानों और आढ़तियों का एक संयुक्त संघर्ष है.’

उन्होंने आगे कहा, ‘यहां साफ तौर पर लोकतंत्र को खत्म करने का प्रयास हो रहा है. नए कृषि कानूनों के खिलाफ वैध तरीके से अपना विरोध जताने के लिए हम पर दबाव डाला जा रहा है. मौजूदा परिस्थिति आपातकाल लागू करने की लग रही है. हम अपने संवैधानिक अधिकार के अनुसार भी विरोध नहीं कर सकते. अगर हम विरोध करते हैं तो हमें दबाने के कदम उठाए जा रहे हैं.’

चीमा ने कहा कि पंजाब आढ़तिया फेडरेशन ने भी मंडियों की बंदी को अपना समर्थन दिया है.

चीमा ने कहा, ‘हमने आयकर छापों के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट जाने का फैसला किया है. हम तब तक मंडियों को बंद रखेंगे जब तक कि इस तरह की दुर्भावनापूर्ण कार्रवाई को नहीं रोका जाता. साथ ही, हमने इस मुद्दे पर किसान यूनियनों से बात की है और इसके बारे में एक संयुक्त कार्रवाई जल्द ही की जाएगी.’

मुख्यमंत्री, विपक्ष और किसान संगठनों ने की निंदा
आढ़तियों पर आयकर विभाग की छापेमारी को लेकर पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने केंद्र सरकार पर निशाना साधा है. सिंह ने शनिवार को आरोप लगाया कि केंद्र आयकर विभाग के छापों के जरिए आढ़तियों को डराने-धमकाने की कोशिश कर रहा है.

कैप्टन ने आगे कहा कि जवाब का इंतजार किए बिना और नोटिस जारी करने के महज चार दिन के भीतर पंजाब के कई आढ़तियों के परिसरों पर आयकर विभाग ने छापेमारी की है. इस तरह के कदमों से भाजपा नेतृत्व वाली केंद्र सरकार के खिलाफ लोगों का गुस्सा और बढ़ेगा.

उन्होंने दावा किया कि यहां तक कि सामान्य प्रक्रिया के रूप में स्थानीय पुलिस को सूचित तक नहीं किया गया और आयकर विभाग की टीमों की छापेमारी के दौरान सुरक्षा उपलब्ध कराने के लिए केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) का इस्तेमाल किया गया.

सिंह ने कहा कि छापों के जरिए आढ़तियों को डराने-धमकाने की कोशिश की जा रही है. इस तरह की दमनकारी कार्रवाई का भाजपा के लिए उल्टा परिणाम होगा.

वहीं, वहीं भाजपा की पूर्व सहयोगी अकाली दल के प्रमुख सुखबीर सिंह बादल ने कहा कि आढ़तियों के खिलाफ केंद्र सरकार इसलिए कार्रवाई कर रही है क्योंकि वे किसानों के आंदोलन का समर्थन कर रहे हैं. उन्होंने किसानों के समर्थन में चंदा भी दिया है.

किसान संगठनों ने आयकर छापे को कृषि कानूनों के खिलाफ जारी आंदोलन को कमजोर करने का प्रयास बताया.

पंजाब के सबसे बड़े किसान संघों में से एक भारतीय किसान यूनियन (एकता उग्रहान) और किसान मजदूर संघर्ष समिति (केएमएससी) ने आयकर छापे की निंदा की और कहा कि केंद्र सरकार आंदोलन का समर्थन करने वाले सभी लोगों को डराने-धमकाने की कोशिश कर रही है.

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